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रिपोर्ट: हिन्दुओं के मुकाबले मुस्लिमों में तलाक की दर बेहद कम है

2011 की जनगणना के मुताबिक़ मुसलमानों के बीच तलाक की दर हिंदुओं की तुलना में कम है। हालाँकि तीन तलाक के मामले पर फिलहाल कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ है। इसमें भी यह संख्या कम हो सकती है।

1. साल 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिमों के बीच तलाक की दर 0.56 प्रतिशत है जबकि हिन्दुओं में यह दर 0.76 प्रतिशत थी।

2. ना तो सरकार और न ही विधि आयोग ने भारतीय मुसलमानों के बीच तीन तलाक़ को लेकर कोई सर्वेक्षण किया है।

3. ज्ञात आकड़े सिर्फ भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) द्वारा किए गए सर्वे पर आधारित हैं। जोकि जनगणना के मुकाबले 11 प्रतिशत अधिक है।

4. बीएमएमए द्वारा किए गए दो सर्वेक्षणों में 10 राज्यों की 4,710 मुस्लिम महिलाएं और दूसरे में आठ राज्यों की 117 मुस्लिम महिलाएं शामिल थीं। ऐसे में विसंगति संभव है।

5. साल 2014 में बीएमएमए को शरीयत अदालतों से तलाक के 219 मामले मिले जिनमें से 22 तीन तलाक़ से संबंधित थे।

6. बीएमएमए द्वारा 117 तलाक के मामलों को कवर करने वाले सर्वेक्षणों में से 0.2 प्रतिशत मामले फोन पर, 0.6 प्रतिशत मामले में ई-मेल के माध्यम से और 0.19 मामले एसएमएस से भेजे गए तलाक़ के थे।

7. बीएमएमए के सर्वे के मुताबिक़ तलाक के 40.57 प्रतिशत मामलों में मुस्लिम महिलाओं ने तलाक की मांग रखी।

8. बीएमएमए सर्वेक्षण में पाया गया कि 2 प्रतिशत मामलों में मुस्लिम पुरुषों की तलाक से पहले से दूसरी पत्नी थी और 38 प्रतिशत मामलों में मुस्लिम पुरुषों ने तलाक के बाद भी अकेले रहना पसंद किया।

9. बीएमएमए द्वारा इकठ्ठा किए गए 117 मामलों में से महज़ दो मामलों में ही महिलाओं को हलाला से गुजरने के लिए कहा गया था।

10. मुसलमानों या हिंदुओं के बीच बहुविवाह की सीमा पर कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ है।

नालसार विश्वविद्यालय हैदराबाद के कुलपति फैजान मुस्तफा कहते हैं कि बैन होने के बावजूद भारत में 1.2 करोड़ बच्चों का बाल विवाह 10 साल की उम्र में ही कर दिया जाता है।

इन बाल विवाह के 84 प्रतिशत मामले हिंदुओं में होते हैं लेकिन सरकार इसके बारे में चिंतित नहीं है।

इस विषय पर सुन्नी थियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद अली खान ने कहा कि तीन तलाक़ मानव अधिकारों के खिलाफ हो सकता है लेकिन हमें यह नहीं बताया जाए कि यह असंवैधानिक है।

उन्होंने आगे कहा कि जब जैन धर्म का धार्मिक उपवास का मामला सर्वोच्च न्यायालय के सामने आया तो अदालत ने क्या किया? इसको जारी रखने की अनुमति दे दी।

यह हमारे लिए कब होगा?

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