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चेयरमैन पद से हटाए गए सायरस मिस्‍त्री फैसले को देंगे चुनौती

मुंबई : Tata Group के पूर्व चेयरमैन सायरस पलोनजी मिस्त्री खुद को हटाए जाने के फैसले खिलाफ कोर्ट में जा सकते हैं। सोमवार को टाटा ग्रुप ने मिस्त्री को हटाते हुए उनकी जगह रतन टाटा को अंतिम चेयरमैन नियुक्त किया है। मिस्त्री को हटाने के बाद टाटा ग्रुप के सबसे बड़े हिस्‍सेदार शापूरजी और पालोनजी ग्रुप ने इस फैसले को अवैध बताया था और इसे कानूनी चुनौती देने की बात कही थी। मिस्त्री निर्माण क्षेत्र के दिग्गज पालोनजी मिस्त्री के छोटे पुत्र हैं, जिनका परिवार टाटा समूह की सर्वाधिक 18.8 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाला परिवार है।

सोमवार को मिस्त्री की जगह रतन टाटा को चार महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्‍त किया गया है और नए चेयरमैन की तलाश के लिए एक कमिटी का गठन किया गया है। कमिटी में रतन टाटा के अलावा, टीवीएस समूह के प्रमुख वेणु श्रीनिवासन, बेन कैपिटल प्राइवेट इक्विटी के प्रबंध निदेशक अमित चंद्रा, अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत रोनेन सेन और वार्बिक मैन्यूफैक्चरिंग ग्रुप के संस्थापक एवं चेयमैन लार्ड कुमार भट्टाचार्य को रखा गया है। भट्टाचार्य को छोड़कर चयन समिति के बाकी सभी सदस्य कंपनी के निदेशक मंडल के भी सदस्य हैं।

आपको बता दें कि मिस्त्री ने चार साल पहले इस विशाल कंपनी समूह के मुखिया का पद रतन टाटा से ही संभाला था। टाटा समूह नमक से लेकर सॉफ्टवेयर और इस्पात से लेकर वाहन विनिर्माण के क्षेत्र में काम करता है। देश-विदेश में फैले इस समूह का एकीकृत कारोबार 100 अरब डॉलर सालाना से ज्यादा है। मिस्त्री को वर्ष 2011 में कंपनी में चेयरमैन रतन टाटा का उत्तराधिकारी चुना गया था और उन्हें पहले डिप्टी चेयरमैन बनाया गया। टाटा संस के चेयरमैन पर दर मिस्त्री का चुनाव पांच सदस्यीय एक समिति ने किया था। मिस्त्री ने रतन टाटा के 75 वर्ष की आयु पूरी करने पर उनकी सेवानिवृत्त के बाद 29 दिसंबर 2012 को चेयरमैन का पद भार संभाला था। मिस्त्री वर्ष 2006 से कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल रहे हैं।

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