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घर के पास 6 मंदिर, गुरुद्वारा और चर्च फिर भी सोनू निगम को सिर्फ अज़ान सुनाई देती है

पार्श्वगायक सोनू निगम के ट्वीट पर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। सोनू निगम के अजान वाले बयान को लेकर सोशल मीडिया पर गुस्सा अब भी बरकरार है। जितने लोग उतनी बाते हो रही हैं। लेकिन सच्चाई इससे अलग है। सोनू निगम मुंबई के पश्चिम अंधेरी के वर्सोवा के जिस पॉश इलाके के लेविश हाई-राइज बिल्डिंग अमरनाथ टावर में रहते हैं वहां कई धार्मिक स्थल है।

सोनू निगम के घर के पास छह मंदिर, एक आर्य समाज मंदिर, एक चर्च, एक गुरुद्वारा और एक मस्जिद है। सोनू के घर के सबसे नजदीक लगभग 452 मीटर की दूरी पर हनुमान मंदिर है। और सबसे दूर राम मंदिर है जो उनके घर से 956 मीटर की दूरी पर है। इसे गूगल मैप्स पर भी बहुत आसानी से देखा जा सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि सोनू निगम को 452 मीटर पर मौजूद मंदिर की घंटी और लाउड स्पीकर की आवाज सुनाई नहीं देती लेकिन 912 मीटर की दूरी पर स्थित मदीना मस्जिद के अजान से उनका नींद में खलल पैदा हो जाता है। वैसे भी देखा जाए तो यह संभव नहीं लगता है कि जो लोग एक बंद वातानुकूलित कमरे में सो रहे हों वो एक किलोमीटर की दूरी लाउडस्पीकर से आ रही आवाज सुनकर परेशान हो जाएं और उठ बैठे?

गौरतलब है कि सोनू ने सोमवार की सुबह एक के बाद एक कई ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने मस्जिदों में होने वाले अजान पर आपत्ति जताई थी। अपने पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “ईश्वर सभी पर कृपा करे। मैं मुस्लिम नहीं हूं और मैं आज अजान से जागा। भारत में कब तक धार्मिक रीतियों को जबरदस्ती ढोना पड़ेगा।”

उनके बाद सोनू ने एक और ट्वीट में किया था जिसमें उन्होंने लिखा था, “और जिस समय मोहम्मद साहब ने इस्लाम बनाया तब बिजली नहीं थी। फिर एडिसन के आविष्कार के बाद हमें इस शोरगुल की क्या जरूरत है?”

एक और ट्वीट में उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता है कि कोई मंदिर या गुरुद्वारा इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल उन लोगों को उठाने के लिए करते हैं जो उस धर्म का पालन नहीं करते। तो फिर ऐसा क्यों…?”

उसके बाद उन्होंने अपने अंतिम ट्वीट में अजान को गुंडागर्दी बताया था, “गुंडागर्दी है बस”

मगर गौर से देखा जाए तो एक के बाद किए गए उनके ट्वीट में यह साफ नजर आएगा कि उन्होंने कई जगह पर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है। उन्होंने अपनी बात की शुरूआत मस्जिदों के अजान से शुरू की और धीरे-धीरे मंदिर और गुरुद्वारा तक आ गए।

सोनू निगम के इस विवादास्पद टिप्पणी के बाद कई मुस्लिम संस्थानों और हिंदू धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। अधिकतर लोगों का कहना है कि वे प्रदूषण मानदंडों का पालन करते हैं और इस बात को ख्याल रखते हैं कि अजान और आरती जैसे धार्मिक संस्कारों से दूसरे लोगों को परेशानी न हो।

मुंबई के सबसे प्रसिद्ध दरगाह हाजी अली  के प्रतिनिधियों ने कहना है कि दिन में ही उनका सबसे महत्वपूर्ण प्रार्थना चलता है। इसके बावजूद वो अपने पड़ोसियों के असुविधा का ध्यान रखते हैं और अधिक शोर न हो इस बात का ख्याल रखते हैं।

दरगाह के सलाहकार और सदस्य मुफ्ती मंसूर जीयाई कहते है, “हम अजान के दौरान अपने लाउडस्पीकरों के आवाज को संतुलित रखते हैं ताकि शोर के स्तर का उल्लंघन नहीं हो। हम यह कई सालों से करते आ रहे क्योंकि इस्लाम में किसी को भी कष्ट पहुंचाने की इजाजत नहीं है।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर आश्चर्य हो रहा है कि शोरोगुल के कई बड़े स्रोत होने के बावजूद मुम्बई के धार्मिक स्थलों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “धार्मिक संस्थानों की तुलना में हवाओं से, सड़क और रेल यातायात से पैदा होने वाले शोर कई गुना अधिक और गगनभेदी है। इस पर ये हस्तियां क्यों अपनी राय नहीं देती हैं?”

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