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तख्तापलट की बरसी का एक साल, एर्दोगन के समर्थन मे सड़कों पर उतरी जनता

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तुर्की के राष्ट्रपति रचेप तैय्यप अर्दोआन ने नाकाम तख्तापलट की पहली बरसी पर इस्तांबुल में लाखों लोग सड़कों पर उतरे । अर्दोआन ने तुर्की की जनता को संबोधित किया.

अर्दोआन ने कहा, “उस रात लोगों के हाथों में बंदूकें नहीं थीं, उनके हाथों में झंडे थे और सबसे अहम उनके साथ उनका विश्वास था.”

अर्दोआन ने तख्तापलट का प्रयास करने वालों को मौत की सज़ा देने के फ़ैसले को सही ठहराया और कहा कि उन्हें ग्वांतनामो बे जेल के क़ैदियों की तरह की ड्रेस पहननी चाहिए.

सेना के एक धड़े ने पिछले साल 15 जुलाई को सरकार के तख्तापलट की कोशिश की थी. तख्तापलट की इस नाकाम कोशिश की लड़ाई में 250 से अधिक लोग मारे गए थे और 2,196 लोग घायल हुए थे.

 

अर्दोआन ने कहा, “मैं अपने देश के उन सभी लोगों का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने अपने देश की रक्षा की.” उन्होंने कहा कि 250 लोगों ने अपनी जान गंवाई, लेकिन देश ने अपना भविष्य सुरक्षित किया.

अर्दोआन ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री बिनाली यिल्दरिम से तख्तापलट की साजिश रचने वालों के बारे में बात की है. अर्दोआन ने कहा, “जब वो कोर्ट में आएं तो उन्हें ग्वांतानामो बे जेल के क़ैदियों की ड्रेस में लाया जाए.”

राष्ट्रपति अर्दोआन ने इसके बाद इस्तांबुल ब्रिज पर शहीद मेमोरियल का भी उद्घाटन किया. इस पुल का नाम बदलकर ‘मार्टियर्स ऑफ़ जुलाई 15’ कर दिया गया है.तुर्की सरकार ने 15 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है.
तुर्की सरकार नाकाम तख्तापलट के बाद लगभग डेढ़ लाख लोगों को बर्ख़ास्त किया था और कहा था कि वो तख़्तापलट का समर्थन करने वालों को दंडित कर रही है.

तुर्की के अधिकारियों ने इस तख़्तापलट की कोशिशों के लिए मुस्लिम धर्मगुरु फ़तेउल्ला गुलेन पर आरोप लगाया था जिसमें जुलाई 2016 में राष्ट्रपति रचेप तैय्यप अर्दोआन को सत्ता से हटाने की कोशिश की गई थी. हालांकि अमरीका में रहनेवाले गुलेन ने उस तख़्तापलट में किसी भी भूमिका से इनकार किया था.

 

 

तख़्तापलट की नाकाम कोशिश पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. प्रधानमंत्री बिनाली यिल्दरिम ने संसद के विशेष सत्र को संबोधित किया. उन्होंने 15 जुलाई 2016 को स्वाधीनता का दूसरा युद्ध बताया.
यिल्दरिम ने कहा, “ठीक एक साल पहले तुर्की की सबसे काली और लंबी रात उजली सुबह में बदली थी.”

 

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