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UGC, AICTE को खत्म करने की तैयारी इसकी जगह लेगी हायर एजुकेशन एंपावरमेंट रेग्युलेशन एजेंसी

दिल्ली : देश के शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार होने जा रहे हैं। मोदी सरकार यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) को समाप्त कर उनकी जगह एक हायर एजुकेशन रेग्युलेटर बनाने जा रही है। इस रेग्युलेटर का नाम अभी हायर एजुकेशन एंपावरमेंट रेग्युलेशन एजेंसी (HEERA) रखा गया है।

एक्सपर्ट्स लंबे समय से इस बड़े बदलाव की जरूरत बता रहे थे, लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई खास प्रगति नहीं हुई थी। मार्च में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक मीटिंग में यह फैसला लिया गया। नए रेग्युलेटर को बनाने में समय लग सकता है और इसे देखते हुए सुधार के अस्थायी उपाय के तौर पर मौजूदा नियमों में संशोधन करने पर विचार किया जाएगा।

वरिष्ठ अधिकारियों ने ईटी को बताया कि HEERA कानून को तैयार करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। मानव संसाधन मंत्रालय और नीति आयोग नए कानून पर काम कर रहे हैं। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत और हायर एजुकेशन सेक्रटरी के.के. शर्मा के अलावा कुछ अन्य विशेषज्ञों की एक कमिटी इस पर काम कर रही है।

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि UGC और AICTE की जगह एक सिंगल रेग्युलेटर लाना अब तक का सबसे बड़ा सुधार होगा और इससे अधिकार क्षेत्र से जुड़ी सभी कमियां दूर हो जाएंगी और इसके साथ ही ऐसे रेग्युलेटरी प्रोविजंस भी समाप्त होंगे जिनकी अब जरूरत नहीं है। हायर एजुकेशन में कई रेग्युलेटरी अथॉरिटीज की जगह एक रेग्युलेटर लाने का विचार नया नहीं है। यूपीए की पिछली सरकार में यशपाल कमिटी और नैशनल नॉलेज कमिशन के अलावा मौजूदा सरकार की ओर से बनाई गई हरि गौतम कमेटी ने भी इसकी सिफारिश की थी।

अधिकारियों ने बताया कि नया रेग्युलेटरी कानून संक्षिप्त हो सकता है और इसमें परिणामों पर ध्यान देने वाले न्यूनतम मानकों को दिया जाएगा। इसके साथ ही उनका कहना था कि टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल एजुकेशन को अलग करने का चलन अब पुराना हो गया है। एक रेग्युलेटर होने से इंस्टिट्यूशंस के बीच तालमेल बेहतर होगा।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि HEERA का मकसद इंस्पेक्टर राज और उत्पीड़न को समाप्त करना है, जिससे UGC को जोड़कर देखा जाता है। लेकिन नए रेग्युलेटर को भी जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने की शक्ति दी जाएगी। नए कानून को लाने और AICTE और UGC ऐक्ट को रद्द करने में समय लग सकता है और इस वजह से अंतरिम उपाय के तौर पर इन एक्ट में संशोधन करने पर विचार किया जा रहा है।
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