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एनडीटीवी पर सीबीआई छापे का विरोध : दिग्गज पत्रकार भी हुए शामिल

भारतीय मीडिया की दिग्गज हस्तियां शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में जमा हुए स्पष्ट शब्दों में सीबीआई द्वारा सम्मानित एनडीटीवी मीडिया हाउस में छापे की निंदा की। इस अवसर पर पत्रकार कुलदीप नायर, प्रणय रॉय, अरुण शौरी, एच.के. दुआ, शेखर गुप्ता, राज चेंगप्पा, रवीश कुमार, देश के अग्रणी विधिवेत्ता फली नरीमन और करीब सौ अन्य प्रख्यात पत्रकार शामिल थे।

 

 

सीबीआई ने एक कथित बैंक ऋण डिफ़ॉल्ट मामले में छापे मारा था जो एनडीटीवी मालिकों और बैंक दोनों में आईसीआईसीआई ने आठ साल पहले तय किया था।
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार एच.के. दुआ ने कहा कि जो संकेत हैं उससे अब एक और आपातकालीन समय है।

 

 

विजय माल्या और ललित मोदी को भारत वापस लाने के बजाय प्रतिष्ठित पत्रकारों में से एक प्रणय रॉय को परेशान किया जा रहा ह। यह जागने का है और हमलों से सावधान रहना है। फली नरीमन ने कहा कि मैं प्रणय पर विश्वास करता हूं।

 

 

 

प्राथमिकी दर्ज करने के लिए सीबीआई द्वारा दिए गए छापे के कारणों के तरीके आपत्तिजनक हैं। कुलदीप नैयर ने कहा कि हम प्रेस की हत्या की अनुमति नहीं दे सकते। यह हमारी प्रतिबद्धता है। प्रेस लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की नींव है। यह देश लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए।

 
एडिटर गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राज चेंगप्पा ने कहा कि ऐसे छापे मीडिया के लिए गंभीर खतरा हैं और यह निंदानीय हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार इसे ध्यान में रखेगी। अरुण शौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत सारे मीडिया साथियों को एक साथ लाने के लिए धन्यवाद दिया।

 

 

 

उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया को अपने मुखपत्र में परिवर्तित कर रही है। यह मीडिया को भी धमकी देना चाहती है और एनडीटीवी इसका एक उदाहरण है। मोदी शासन की प्रकृति एकतावादी है और वह हर जगह पर हावी होना चाहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि मीडिया के खिलाफ उठाए गए किसी भी हाथ को या तो वापस लिया गया या फिर वह जल गया।

 

ओम थानवी ने कहा कि यदि ऐसे समय में मीडिया एकजुट होकर आंदोलन नहीं करेगा तो ऐसा दूसरों के साथ भी होगा। एक-एक करके उन्होंने सभी संस्थानों को निशाना बनाया है। अब वे मीडिया को लक्षित कर रहे हैं।

 
अंत में एनडीटीवी के सह संस्थापक प्रणय रॉय ने कहा कि यह एनडीटीवी के लिए नहीं लेकिन हम सभी के लिए एक संकेत है। वे यह कहना चाहते हैं कि यदि आप गलत नहीं हैं तो भी हम आपको दबा सकते हैं।

 

 

याद रखें यह संकेत पूरे मीडिया जगत के लिए है और हमें इसका विरोध करना चाहिए। हमारा विरोध सीबीआई के खिलाफ नहीं है। उन राजनेताओं के खिलाफ है जो हमारे देश को बर्बाद करने के लिए इन संस्थाओं का उपयोग कर रहे हैं।

 

 

भावुक हुए रॉय ने कहा कि मैंने और मेरी पत्नी ने कभी भी काले धन को छुआ नहीं और न ही पूरे जीवन में किसी रिश्वत दी। कई पत्रकार जो दिल्ली में नहीं थे उन्होंने समर्थन में संदेश भेजे। इनमें इंडिया टुडे के संपादक अरुण पूरी और राजदीप सरदेसाई भी शामिल थे।

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