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जब बच्चा चोर कहकर आसपास के गांव वालों ने मुसलमानों पर हमला किया

घाटशिला का रहने वाला पेशे से व्यापारी नईम जिसकी सुसराल हल्दीपोखर है, वह सुसराल से चोरी हो चुके पांच जानवरों और निकट के उडीसा हाट तिरंग में उनकी बिकरी की खबर सुन सुसराल पहुंचा।  सुबह 4 बजे उसे खबर मिली कि जो गाड़ी से चोरी के जानवर ले जाए जाते है वह पड़ोस के गांव हाता के निकट है।

नईम अपने लोकल साथी सज्जू (जो अभी-अभी सऊदी से आया था) सिराज, जो ड्राइवर था, हलीम जो ट्रांसपोर्ट कारोबारी था, सभी इंडिका से उसका पीछा करने निकल पडे। लेकिन राजनगर के करीब पहुंचते ही जानवर वाला वाहन ओझल हो जाने के बाद वह पास के ही गांव शोभापुर जहां नईम का साढ़ू मुर्तजा रहता है, उसके घर पहुंचे। तभी कुछ ग्रामीण मुर्तजा के घर आकर कहने लगे कि बच्चे चोरी करने वाले लोग अपके घर में है?

मुर्तजा ने बताया कि ये मेरे रिश्तेदार है। सभी ग्रामीण वापस चले गए। अचानक हजारों की तादाद में आसपास के गांव के लोगों ने हमला कर दिया और मुर्तजा के घर को आग लगा दी।  नईम को पीटते पीटते मार डाला। सज्जू और सिराज का भी यही हश्र हुआ। जबकि हलीम की कोई खबर नहीं है।

ये खबर मिलते ही राजनगर थाना के थानेदार में तनाव की खबर सुन थाना प्रभारी घटना स्थल पहुंचे। लेकिन जब वह नईम के साथी को कस्टडी देने की कोशिश में थे। तभी उनपर भी हमला हो गया और पुलिस वाहन को भी जला दिया गया। जबकि नईम की इंडिका को आग के हवाले कर दिया गया।

उधर पोस्टमार्टम के लिए जब तीनों लाश जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेडिकल कालेज हॉस्पिटल लाई गईं। तब मकतुलों के गांव के मुखिया और वहां के वासियों ने कहा कि प्रशासन सारे हत्यारों को 24 घंटे में गिरफ्तार करे। मुख्यमंत्री मृतकों के परिवार से मिलकर जब तक प्रत्येक को 25 लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी नहीं देते शव का अंतिम संस्कार नहीं होगा।

सोचिए कि यह भीड़ मुसलमानों की नहीं थी वर्ना अबतक उस भीड़ में से सलमान, नईम, मुखतार जैसे नाम वाले लोग पकड़ाए जा चुके होते। लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसी पर भी आपराधिक केस भी नहीं हुई है। प्रश्न ये भी है कि कुछ ही पल में हजारों की भीड़ कहां से आ गई? लोगों का कहना है कि राजनगर शोभापुर घटना, जब बच्चा चोर कहकर आसपास के गांव वालों ने मुसलमानों पर हमला किया हैं। प्रश्न ये भी है कि जमशेदपुर में एक महीने के भीतर ये 5वीं घटना है जिसनें समुदाय विशेष ही शिकार हो रहे हैं जो कोई इत्तेफाक नहीं लगता।

क्यरा धुवर दास इसका जवाब सार्वजनिक तौर पर मीडिया को संबोधित करते हुए देंगे? क्या पीड़ितों के परिवार को इंसाफ मिलेगा? मुआवजा के साथ-साथ कातिलों पर कारवाई भी होनी चाहिए। रधुवर दास को ठोस कदम उठाने चाहिए और प्रशासन को मजबुत टीम देकर गांव में घुसने के आदेश देने चाहिए, जहां से अभी भी एक युवक की लाश नहीं मिली है और प्रशासन वहां जाने से डर रही है।

अशरफ हुसैन के फेसबुक वॉल से

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