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कौन थे इब्ने सफ़ी, जिन्हें जासूसी दुनिया का बादशाह कहा जाता है

इब्ने सफ़ी का असल नाम इसरार अहमद था। इब्ने सफ़ी उर्दू अदब के नामचीन अफ़साना निगार, नॉवेल निगार और बेहतरीन शायर थे। इनके नॉवेलों में जासूसी दुनियां, फरीदी हमीद सीरीज़ और इमरान सीरीज़ शामिल हैं। इसके अलावा हास्य भी लिखते थे। लेकिन यह अपने जासूसी सीरिज़ की वजह से पूरी दुनियां में मशहूर हुए। इनके जासूसी सीरिज़ का दुनियां के कई भाषों में अनुवाद हुआ।

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जनाब इब्ने सफ़ी बेशक उर्दू के सबसे बड़े जासूसी नॉवेल निगार गुज़रे हैं और उनके लेखन में ऐसा जादू है कि 50 साल पहले लिखे गए नॉवेल जब आज के दौर का इंसान भी पढ़ता है तो वह सब कुछ भूल जाता है। इब्ने सफ़ी का लगाया हुआ पौधा इमरान सीरीज इस क़द्र बढ़ा चढ़ा कि आज तक यह फल फूल रहा है, और कई एक लेखक इस सिसिले को आगे बढ़ा रहे हैं।

इब्ने सफ़ी की कला को मानने वाली पश्चिमी हस्तियां महिला नॉवेल निगार अगाथा क्रिस्टी, उर्दू भाषा की जर्मन विद्वान महिला क्रिस्टीना ओस्टर हेल्ड और नारवेजियन प्रोफेसर फन थीसन शामिल हैं। क्रिस्टीना ओस्टर हेल्ड ने इब्ने सफ़ी की कला के बारे में कहा था:

“इब्ने सफ़ी की जिस बात से मैं सबसे ज़्यादा प्रभावित हूँ, वह यह है कि उनके किरदार फरीदी और इमरान कभी किसी महिला की ओर गलत नज़र से देखते हुए दिखाई नहीं देते। इब्ने सफ़ी के जासूसी नॉवेल की जासूसी अदब में इस लिहाज से अनोखी हैसियत है कि उसमें एक मिशन या मकसद मौजूद है। इसलिए इसे केवल मनोरंजन साहित्य नहीं कहा जा सकता। उनके जासूसी नॉवेलों में बौद्धिक और मानसिक प्रशिक्षण भी पूरी तरह मौजूद है”।

इब्ने सफ़ी का जन्म आज ही के दिन यानी 26 जुलाई 1928 को सफ़ी उल्लाह और नजीरा बीबी के घर नारा, इलाहाबाद (ब्रिटिश इण्डिया) में हुआ, इनको 26 जुलाई के दिन ही कराची (पाकिस्तान) में दफ़नाया गया, जबकि इनकी मौत 25 जुलाई 1980 को कराची में हुई थी।

आज़ादी के बाद अगस्त 1952 में इब्ने सफ़ी अपनी मां और बहन के साथ पाकिस्तान चले गए, जहां उन्होंने कराची के क्षेत्र लालू खेत के सीवन में 1953 के बाद से 1958 तक रहे। उनके पिता 1947 में कराची आ चुके थे।

उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा नारा प्राथमिक स्कूल में हासिल की। मीट्रिक डीएवी स्कूल इलाहाबाद से किया जबकि मध्यवर्ती शिक्षा इलाहाबाद के इविंग क्रिश्चियन कॉलेज से पूरी की। बीए की डिग्री विश्वविद्यालय आगरा से पूरी की। जब इन्होने लिखना शुरू किया तो लोग इनको अलग अलग नामों से पुकारते थे, इनको तगरल फुर्गान और संकी सोल्जर कहते थे।

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