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आख़िर क्या है ‘यश भारती अवार्ड’ जिसकी जाँच कराएगी योगी सरकार

योगी सरकार ने प्रदेश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘यश भारती पुरुस्कार’ की जांच का आदेश दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह अवार्ड है क्या? किसे और किस योग्यता के आधार पर दिया जाता है?

यह आईए आपको बताते हैं यश भारती सम्मान के बारे में।

उत्तर प्रदेश सरकार का सर्वोच्च पुरस्कार है यश भारती सम्मान. यह पुरस्कार साहित्य, समाजसेवा, चिकित्सा, फिल्म, विज्ञान, पत्रकारिता, हस्तशिल्प, संस्कृति, शिक्षण, संगीत, नाटक, खेल, उद्योग और ज्योतिष के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले को दिया जाता है. इस पुरस्कार में प्रशस्ति पत्र, शाल और 11 लाख रुपए दिए जाते हैं. इसके अलावा आवेदन किए जाने पर प्रतिमाह पेंशन के तौर पर 50 हजार रुपए देने का भी प्रावधान है.

यश भारती सम्मान दिए जाने की शुरुआत वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश के तत्काकालीन मुख्यमंत्री ने की थी. इस सम्मान का मकसद था प्रदेश से जुड़ी कला, साहित्य, खेल, संगीत आदि विभिन्न क्षेत्र में ऐसी हस्तियों को सम्मानित करना, जिन्होंने देश और विदेश में प्रदेश का नाम ऊंचा किया हो. पहले यश भारती से सम्मानित होने वाली हस्तियों को 5 लाख रूपये की धनराशि दी जाती थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 11 लाख रूपये कर दिया गया था.

2016 में 71 तो 2015 में 56 को मिला यशभारती
2015 में सपा सरकार ने कुल 56 हस्तियों का सम्मान हुआ था जबकि 2016 में 71 सेलेब्रिटी इस पुरुस्कार से नवाजे गए. हालांकि उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से साल 2016-17 में पहले सिर्फ 65 विभूतियों को यश भारती देने की घोषणा की थी

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