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मौत के 4 साल बाद भी जियाउल हक को नहीं मिला इंसाफ

Deoria: Wife of slain police officer Zia-ul-Haq mourns his death at their residence in Deoria on Monday. PTI Photo (PTI3_4_2013_000206A)

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में स्थित कुंडा तहसील के बलीपुर गांव में दो बीघा जमीन और उसके एक किनारे पर अधूरी बनी कुछ दुकानें, जिस पर कब्जे के लिए हुए खूनी संघर्ष ने 2 मार्च 2013 को महज सवा घंटे के भीतर नन्हे सिंह यादव और उसके भाई सुरेश यादव की जान ले ली थी।

घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र के बेहद ईमानदार क्षेत्राधिकारी जियाऊल हक अपने 2 गनमैन लेकर उस जगह रात 8 बजे पहुँच गये। घटनास्थल पर खतरा देख जियाऊलहक के दोनों गनर उनको छोड़कर भाग खड़े हूए। रात 11 बजे भारी पुलिस बल बलीपुर गांव पहुंचा और सीओ की तलाश शुरू हुई। आधे घंटा बाद उसी क्षेत्र में जियाउल हक का शव प्रधान के घर के पीछे खड़ंजे पर पड़ा मिला।

दरअसल बलीपुर का वह इलाका जहाँ जियाउल हक की हत्या हुई वो राजा भैया का कहा जाता। इसी क्षेत्र से राजा भैया लगातार पांच बार विधायक बन चुकें हैं। बलीपुर गांव में घुसते ही लोहे के सफेद बोर्ड पर लाल-हरे रंग से ‘‘राजा भइया जिंदाबाद’’ लिखा है, जो यह बताने के लिए काफी है कि इस इलाके में किसका सिक्का चलता है।

बोर्ड पर निवेदक के रूप में बलीपुर गांव के प्रधान रहे नन्हे सिंह यादव का नाम है। नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी जाने के बाद जिन चार लोगों ने जियाउल हक़ को गोलियाँ मारी वो चारों राजा भैया के आदमी थे और सीबीआई ने भी यही कहा था जिसके बाद राजा भैया ने यूपी सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

सीबीआई ने भी हत्या के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। अपनी हत्या किए जाने से छह महीने पहले ही डीएसपी जिया उल हक ने राजा भैया के खिलाफ 47 मामलों की सूची बना ली थी। इनमें हत्या, हत्या के षडयंत्र और गैंगस्टर गतिविधियों के कई मामले शामिल हैं। जिनमें राजा भैया पर 1995 में प्रतापगढ़ के दिलेरगंज गाँव में अपने गुंडों के साथ मिल कर 20 घर जलाने के आरोप हैं।

इनके गुंडों पर तीन मुस्लिम लड़कियों का रेप के बाद उनको मार देने का आरोप है। एक लड़के को गाड़ी में बांधकर पूरे गांव में खींचने का आरोप। तालाब में घड़ियाल पालने का और उन्हे नरबली देने का आरोप, ( तालाब में पाया गया था कंकाल), 03 नवंबर 2002 में भाजपा विधायक पूरन सिंह को जान से मारने की धमकी के आरोप, 2002 को ही राजा भैया और उनके पिता उदय प्रताप सिंह के खिलाफ डकैती और घर कब्जाने के आरोप। 2003 को राजा भैया तथा उदय प्रताप सिंह के घर छापा, हथियार और विस्फोटक बरामद हुआ था।

ऐसे कई आरोपो के बाद राजा भैया गिरफ्तार हुए और 2005 को जमानत मिलने के बाद राजा भैया जेल से रिहा भी हो गए, लेकिन जियाउल हक्क साहब ने राजा भैया के खिलाफ 47 से ज्यादा गंभीर अपराधो में पुरे सबूत इकठ्ठा कर लिए थे और जल्द वो राजा भैया पर कानून का शिकंजा कसने वाले थे। तभी उनकी हत्या कर दी गई।

इसके बाद शहीद हक़ साहब की पत्नी डा. परवीन आज़ाद को चुप रहने के लिए दबाओ डाला जाने लगा, यहाँ तक कि जब सरकार, प्रशासन और बाकी की मशीनरी उनकी पत्नी को नही झुका पाई तो इलैक्ट्रॉनिक मीडिया ने समाज मे बदनाम करने के लिये ,लोगों के बीच गलत छवि बनाने के लिये उन पर आरोप लगा दिया कि उन्होने परिवार के आठ लोगों के लिये नौकरी कि मांग कि थी।

लेकिन परवीन आजाद कभी नहीं झुकीं। इस महिला को इंसाफ के नाम पर अखिलेश ने शायद ही कुछ दिया, उपर से ठाकुर वोटों के लालच में अखिलेश यादव द्वारा सब लीपापोती कर दी गयी उत्तरप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद नवाज़े गए। वहीं शहीद जियाउल हक़ की हत्या के बाद अखिलेश ने कहा था कि शहीद को छोड़कर भागने वाले पुलिस कर्मियो को बर्खाश्त किया जायेगा लेकिन अखिलेश ने वो भी नही किया।

अब तक, सिर्फ जनता से झूठ बोला गया था, बर्खाश्त करना तो सपने की बात है सभी पुलिस कर्मी आज भी उसी प्रतापगढ़ जनपद में मलाईदार पदों पर पदासीन है। आखिर ये अखिलेश सरकार का कितना बड़ा मजाक है जनता के साथ की आज भी जियाउल हक़ की हत्या की साज़िश रचने वाले और उनको अकेला छोड़ भागने वाले पुलिस कर्मी उसी प्रतापगढ़ में मौज कर रहे है।

तो आप ही फैसला कीजिये कि 2 मार्च 2013 को एक डिएसपी की हत्या हुई थी या पुरे लोकतंत्र की ? आज का दिन उसी लोकतंत्र की हत्या की याद दिलाता है और उत्तर प्रदेश के सियासी इतिहास का ये बदनुमा दाग अखिलेश मुलायम के सर से कभी नहीं मिटेगा।

आखिर में इस देश में जब-जब किसी महिलाओं की हिम्मत और हौसले की बात उठती है तो निर्भया जैसी लड़कियों का ही नाम लिया जाता है जबकी परवीन आज़ाद, जकिया जाफरी जैसों के लिए कभी महिला सशक्तिकरण को समर्पित नही किया जाता, जो तमाम भारतीय महिला एवं पुरुष के लिये एक मिसाल है , जिवटता की ,बहादूरी की ,अकेले संघर्ष की।

  • अशरफ हुसैन 

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