रईस अंसारी

रईस अंसारी

कोई दरख़्त कोई साइबां रहे ना रहेबुज़ुर्ग ज़िंदा रहें आसमां रहे ना रहेहमें तो पढ़ना है मैदान जंग में …

रईस अंसारी ( लखनऊ )

रईस अंसारी ( लखनऊ )

उन्हीं के सदक़े में मुझ को ये रिज़्क मिलता हैमैं जिन परिन्दों को दाना खिलाया करता थापड़ा हुआ है वो ठ…

जलाल मैकश

जलाल मैकश

इस की पकड़ से दूर भला कैसे जाओगेसामान होगा साथ वही जो कमाओगेजितनी भी चाहो कर लो अदाकारीयाँमगर बच भी …

जौहर कानपूरी

जौहर कानपूरी

शहनशाही नहीं हम को फ़क़ीरी कर अता मौलाज़मीनों पर नहीं दिल पर हुकूमत चाहते हैं हमकरो अपना भला लेकिन व…