महफ़िल-ए-शायराना #2

महफ़िल-ए-शायराना #2

क्यूँ शाख पे बैठे हो उड़ क्यूँ नहीं जाते, ऐ वादा फरामोश सुधर क्युँ नहीं जाते।   कब से बैठे हो मे…

महफ़िल-ए-शायराना।

महफ़िल-ए-शायराना।

इस गली में  वो भूखा किसान रहता है, ये वह ज़मीन है जहाँ आसमान रहता है।   मैं डर रहा हूँ हवा से ये…

बिंत-ए-लमहात

बिंत-ए-लमहात

तुम्हारे लहजे में जो गर्मी-ओ-हलावत है इसे भला सा कोई नाम दो वफ़ा की जगह गनीम-ए-नूर का हमला कहो अँध…