बिंत-ए-लमहात

बिंत-ए-लमहात

तुम्हारे लहजे में जो गर्मी-ओ-हलावत है इसे भला सा कोई नाम दो वफ़ा की जगह गनीम-ए-नूर का हमला कहो अँध…

तू इस वक़्त अकेला होगा

तू इस वक़्त अकेला होगा

दुख की लहर ने छेड़ा होगा याद ने कंकड़ फेंका होगा आज तो मेरा दिल कहता है तू इस वक़्त अकेल…

दिल की बात लबों पर लाकर,

दिल की बात लबों पर लाकर,

हबीब जालिब की इस ग़ज़ल को मेहदी हसन और मु्न्नी बेगम व दीगर कई गुलूकारों ने गाकर मक़बूल किया है। …

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हा बुझ गई आस, छुप गया तारा थरथराता रहा धुआँ …

…पर यकीं से भी कभी

…पर यकीं से भी कभी

अली सरदार जाफ़री उर्दू की तरक्की पसंद शायरी में अहम मुक़ाम रखते हैं। उनकी नज़्मों में जदीद ज़िन्दगी…

सागर ऐसा होता है

सागर ऐसा होता है

जब वो मिलने आ जाता है, अक्सर ऐसा होता है नज़रें जम कर रह जाती हैं, मंज़र ऐसा होता है हमको कुछ माल…

फ़िक्रिया

फ़िक्रिया

सप्रिटिज़म की ये बला क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है बेटे जलते हैं माएं मरती हैं या इलाही य…