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अंबेडकर की सवानिह हयात की हामिद अंसारी के हाथों इजराई

नायब सदर जम्हूरिया मुहम्मद हामिद अंसारी ने डाक्टर बाबा साहिब अंबेडकर की सवानिह हयात की इजराई की जिस में अंबेडकर के तर्ज़ फ़िक्र और वक़तन पौक़तन ली जाने वाली हिक्मत अमलियों का तज़किरा मौजूद है।

नायब सदर जम्हूरिया मुहम्मद हामिद अंसारी ने डाक्टर बाबा साहिब अंबेडकर की सवानिह हयात की इजराई की जिस में अंबेडकर के तर्ज़ फ़िक्र और वक़तन पौक़तन ली जाने वाली हिक्मत अमलियों का तज़किरा मौजूद है।

इस मौके पर हामिद अंसारी ने कहा कि वो मज़कूरा किताब को दो वजूहात की बुनियाद पर बहुत ही अज़ीज़ रखते हैं। पहली वजह ये है कि इस किताब में बाबा साहिब के तर्ज़ फ़िक्र और तहरीरों को यकजा किया गया है और दूसरे ये कि किताब के ज़रिया बाबासाहब की शख़्सियत के उन गोशों पर भी रोशनी डाली गई है जिस पर मज़ीद कुछ लिखा जा सकता है।

किताब के मुसन्निफ़ मंसूबा बंदी कमीशन के रुक्न नरेंद्र याद‌व हैं जिस में उन्होंने बड़ी ही जाँफ़िशानी से बाबा साहिब अंबेडकर की जानिब से की गई तक़रीरों का अहाता भी किया है। इस मौके पर नरेंद्र याद‌व ने कहा कि किताब का असल सहरा मर्कज़ी वज़ीर जय राम रमेश के सर बंधना चाहिए क्योंकि उनके बार बार इसरार पर मैंने किताब तहरीर की।

नरेंद्र याद‌व ने 1992 में बाबासाहब अंबेडकर पर अपनी पहली किताब तसनीफ़ की थी और किताब के इक्तिबासात को जय राम रमेश क़िस्त वार एक अख़बार के कालम में पेश किया करते थे और तब से ही जय राम रमेश की ख़ाहिश थी कि में अंबेडकर की ज़िंदगी पर कोई किताब तसनीफ़ करूं।

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