Friday , December 15 2017

अक़लियती कमीशन की तशकील का मुआमला हाइकोर्ट से रुजू

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच जो जस्टिस अजय लाम्बा पर मुश्तमिल थी, ने आज रियासत के महिकमा अक़लियती बहबूद के सेक्रेटरी देवेश चतुर्वेदी को तौहीन अदालत का नोटिस जारी करते हुए उनसे सवाल किया है कि क्यों ना उनके ख़िलाफ़ तौहीन अदालत का मुक़द्दमा चला कर सज़ा-ए-दी जाये।

फ़ाज़िल बेंच ने उन्हें 23 जनवरी 2014 को अदालत में हाज़िर होकर अपने मौक़िफ़ रखने की हिदायत दी है। फ़ाज़िल बेंच ने इलाहाबाद हाइकोर्ट के वकील फ़ारूक़ अहमद ऐडवोकेट की इस मफ़ाद-ए-आम्मा की रिट पर दी है जिस में दर्ख़ास्त गुज़ार ने इलाहाबाद हाइकोर्ट के साबिक़ा फ़ैसला के हवाले से कहा था कि हाइकोर्ट ने रियासती हुकूमत को हिदायत दी थी कि वो 30 सितंबर तक उत्तरप्रदेश में अक़लियती कमीशन की तशकील करदे।

ये मुद्दत गुज़र गई लेकिन रियासती हुकूमत ने कमीशन की तशकील नहीं की, जिस पर फ़ारूक़ अहमद ऐडवोकेट ने महिकमा अक़लियती बहबूद के सेक्रेटरी द्वेष चतुर्वेदी को तौहीन अदालत का नोटिस जारी करते हुए उन से जवाब मांगा इस नोटिस के जवाब की मुद्दत भी 12 नवंबर को पूरी होगई जिस के बाद दर्ख़ास्त गुज़ार ने हाइकोर्ट में तौहीन अदालत का मुक़द्दमा दाख़िल किया जिस पर आज अदालत में समाअत हुई।

दर्ख़ास्त गुज़ार का कहना था कि चूँकि अखिलेश यादव की हुकूमत को इक़तिदार में आए पौने दो साल होगए हैं इस मुद्दत उसने अक़लियती कमीशन को तो अपनी पहली फ़ुर्सत में तहलील कर दिया लेकिन अब तक अक़लियती कमीशन की तशकील तो नहीं की अक़लियती कमीशन ना होने की वजह से रियासत के अक़लियती फ़िर्क़ा बिलख़सूस मुसल्मानों को अपने मुआमलात सरकारी सतह पर हल कराने में तमाम तरह की दुशवारियों का सामना करना पड़ रहा है।

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