Saturday , December 16 2017

अक़लियती तलबा 2012-13 की मर्कज़ी और रियासती स्कॉलरशिप्स से महरूम !

सचर कमेटी की रिपोर्ट में मुसलमानों को तालीमी और मआशी एतबार से हिंदुस्तान में सब से ज़्यादा पसमांदा क़रार देते हुए उन्हें तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने की सिफ़ारिश की गई चुनांचे अक़लीयतों को तालीमी सतह पर ऊंचा उठाने के लिये मर्कज़ी और रियास

सचर कमेटी की रिपोर्ट में मुसलमानों को तालीमी और मआशी एतबार से हिंदुस्तान में सब से ज़्यादा पसमांदा क़रार देते हुए उन्हें तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने की सिफ़ारिश की गई चुनांचे अक़लीयतों को तालीमी सतह पर ऊंचा उठाने के लिये मर्कज़ी और रियासती हुकूमत की जानिब से प्री और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप्स फ़राहम करने का एलान किया गया लेकिन साल 2012-13 के लिये जिन लाखों तलबा तालिबात ने स्कॉलरशिप्स के लिये दरख़्वास्तें दाख़िल की थीं उन्हें अभी तक स्कॉलरशिप की रक़म हासिल ना होसकी। जिस के नतीजा में औलियाए तलबा में काफ़ी बेचैनी पाई जाती है।

दफ़्तर सियासत पर पहुंच कर कई औलियाए तलबा ने बताया कि हज हाउज़ में जब वो महकमा अक़लीयती बहबूद और रियासती अक़लीयती मालीयाती कारपोरेशन से स्कॉलरशिप्स के बारे में मालूमात हासिल करने रुजू होते हैं तो उन्हें अजीबो गरीब जवाबात देकर टालने की कोशिश की जाती है। एक महकमा दूसरे महकमा के दफ़्तर को जाने के लिये कहता है तो दूसरा महकमा बड़े महकमा के दफ़्तर से रुजू होने का मश्वरा देता है।

नतीजा में गरीब औलियाए तलबा को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वाज़ेह रहे कि अक़लीयतों को तालीमी शोबा में आगे बढ़ाने और उन के बच्चों को तर्क तालीम से रोकने के लिये साबिक़ा मर्कज़ी हुकूमत और रियासती हुकूमत ने अव्वल जमात ता पी एच डी स्कॉलरशिप्स देने का आग़ाज़ किया था लेकिन साल 2012-13 की स्कॉलरशिप्स से तलबा तालिबात अब तक महरूम हैं।

औलियाए तलबा अब ये सवाल करने लगे हैं कि आया आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की अलहिदगी से तलबा की स्कॉलरशिप्स की तक़सीम पर असर तो नहीं पड़ा है। स्कॉलरशिप्स का बेचैनी से इंतेज़ार कर रहे औलियाए तलबा का इल्ज़ाम है कि महकमा अक़लीयती बहबूद और दफ़्तर डिस्ट्रिक्ट माइनॉरिटी वेलफ़ेयर ऑफीसर पर रुजू होने पर कोई इत्मीनान बख़्श जवाब नहीं दिया जा रहा है।

जिस से ऐसा महसूस होता है कि इन महकमों के ओहदादार ख़ुद स्कॉलरशिप स्कीम के मौजूदा मौक़िफ़ के बारे में लाइल्म हैं। इन तमाम मुश्किलात के बावजूद स्कॉलरशिप्स के फॉर्म्स दाख़िल किए गए लेकिन काफ़ी अर्सा गुज़र जाने के बावजूद अक़लीयतों को सिर्फ़ इंतेज़ार किराया जा रहा है।

अगर चीफ मिनिस्टर इस जानिब तवज्जा दें तो काफ़ी अर्सा से इल्तवा में पड़ा ये मसअला घंटों में हल हो सकता है।

TOPPOPULARRECENT