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अक़ल्लीयती इदारों(संस्थानो) में बे क़ाईदगियों को दूर करने अवामी मसाइल(समस्या) की समाअत(सुनना)

हैदराबाद‍‍‍‍३१अक्टूबर, ( सियासत न्यूज़) महिकमा अक़ल्लीयती बहबूद के इदारों(संस्थानो) में बे क़ाईदगियों का पता चलाने के लिए सैक्रेटरी अक़ल्लीयती बहबूद दाना किशवर ने हफ़्ता में एक दिन हज हाइज़ में अवामी मसाइल और शिकायात की समाअत क

हैदराबाद‍‍‍‍३१अक्टूबर, ( सियासत न्यूज़) महिकमा अक़ल्लीयती बहबूद के इदारों(संस्थानो) में बे क़ाईदगियों का पता चलाने के लिए सैक्रेटरी अक़ल्लीयती बहबूद दाना किशवर ने हफ़्ता में एक दिन हज हाइज़ में अवामी मसाइल और शिकायात की समाअत का दिन मुक़र्रर किया।इस सिलसिला में कल पहली मर्तबा अवामी मसाइल की समाअत की गई जिस के नताइज हौसला अफ़ज़ा-ए-नहीं रही।सुबह 10ता दोपहर एक बजे तक सैक्रेटरी दीगर ओहदेदारों के साथ मसाइल के इंतिज़ार में रहे लेकिन सिर्फ 16 दरख़ास्तें ही वसूल हुईं जिन में 14दरख़ास्तें अक़ल्लीयती फ़ीनानस कारपोरेशन में स्कालरशिप से मुताल्लिक़(संबंधित‌) थीं।

अक़ल्लीयती इदारों में बे क़ाईदगियों को दूर करने और अवाम को इन इदारों की असकीमात से फ़ैज़याब करने केलिए उन के मसाइल की समाअत यक़ीनन एक मूसिर इक़दाम है लेकिन ये उस वक़्त तक कामयाब नहीं होसकता जब तक कि इस की मुनासिब तशहीर ना की जाई। ऐसा नहीं है कि अक़ल्लीयतों के मसाइल और उन की शिकायात कम होचुकी हैं बल्कि मसाइल और शिकायात तो बहुत ज़्यादा हैं लेकिन अवाम को बहुत कम भरोसा है कि इन की शिकायात की यकसूई(बेफिरी) होगी।

अक़ल्लीयती इदारों से अवाम को अब तक जो तल्ख़ तजुर्बा हुआ है वो यही है कि इन की दरख़ास्तों और शिकायात को कचहरे दान की नज़र करदिया गया। यही वजह है कि अवाम सैक्रेटरी की जानिब से रास्त तौर पर अवाम से मुलाक़ात के प्रोग्राम के एहतिमाम के बावजूद बड़ी तादाद में शिरकत से गुरेज़ कररहे हैं।अक़ल्लीयती इदारों पर अवाम का एतिमाद बहाल करने केलिए ज़रूरी है कि हुकूमत सिर्फ शिकायात और मसाइल की समाअत पर इकतिफ़ा-ए-करने के बजाय उन की यकसूई पर तवज्जा दी।

जब तक मसाइल की यकसूई नहीं होगी उस वक़्त तक इन इदारों पर अवाम का एतिमाद बहाल नहीं होगा।अब जबकि सैक्रेटरी अक़ल्लीयती बहबूद ने अक़ल्लीयतों के मसाइल की यकसूई और अक़ल्लीयती असकीमात पर मूसिर अमल आवरी केलिए संजीदा इक़दामात शुरू किए हैं तो महिकमा अक़ल्लीयती बहबूद और अक़ल्लीयती इदारों की ज़िम्मेदारी है कि वो अवामी मसाइल की समाअत के इस प्रोग्राम की मुनासिब तशहीर(सार्वजनिक अपमान‌) करे क्योंकि मुनासिब तशहीर ना होने के सबब भी इस प्रोग्राम पर असर पड़ रहा ही।

ज़रूरत इस बात की है कि अवामी समाअत से एक दिन क़बल और इसी दिन अख़बारात बिलख़सूस उर्दू अख़बारात में महिकमा अक़ल्लीयती बहबूद(भलाई) की जानिब से इश्तिहारात() और ख़बर शाय की जाय ताकि अवाम, अवामी समाअत के इस प्रोग्राम से वाक़िफ़ रहीं। मुनासिब तशहीरर(सार्वजनिक अपमान‌) के ज़रीया ही अक़ल्लीयतों में उन के मसाइल की यकसूई केलिए शऊर बेदार किया जा सकता ही। दिलचस्प बात तो ये है कि अक़ल्लीयती इदारों के हुक्काम ही नहीं चाहते कि इस प्रोग्राम की ज़्यादा तशहीर हो क्योंकि इस से उन की बे क़ाईदगीयाँ मंज़रे आम पर आने का ख़ौफ़ ही।

वो नहीं चाहते कि अवाम असकीमात पर अमल आवरी में इन की लापरवाही और अदम तवज्जही के बारे में सैक्रेटरी से शिकायत करें। ज़रूरत इस बात की भी है कि सैक्रेटरी अक़ल्लीयती बहबूद हर अवामी समाअत के मौक़ा पर गुज़श्ता समाअत के दौरान वसूल होने वाली दरख़ास्तों(प्रार्थनापत्र‌) और उन की यकसूई की तफ़सीलात (विवरण‌)से भी मीडीया को वाक़िफ़ कराईं ताकि ये बात अवाम तक भी पहुंच सकी

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