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यूपी की कमान अखिलेश को देने की शर्त पर कांग्रेस सपा के साथ

लखनऊ : बीजेपी को रोकना है तो बड़ा सियासी धमाका करना होगा. इसलिए कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके घर पहुंचे. कहानी कहती है अमर सिंह उनको लेने गए और लेकर आए. मुलायम से मिलवाया. फिर प्रशांत किशोर वापस चले गए. लेकिन ‘आज तक’ आपको बताता है कि सच्चाई क्या थी.

राहुल अखिलेश से रिश्ता जोड़ना चाहते हैं लेकिन मुलायम शिवपाल और अमर सिंह की हैसियत वही रखना चाहते हैं जैसे बिहार में लालू यादव की थी यानी बिहार का नीतीश फॉर्मूला राहुल उत्तर प्रदेश में अखिलेश फॉर्मूले की तर्ज पर इस्तेमाल करना चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने तय कर लिया है कि वह अखिलेश का साथ देने के लिए तैयार है. सम्मानजनक सीटें यानी 125 से 150 के बीच लेने को तैयार हैं. लेकिन बिहार में नीतीश की तरह अखिलेश यादव ही चेहरा बने और जनता में संदेश जाए कि समाजवादी पार्टी ही नहीं महा गठबंधन में सब कुछ अखिलेश होंगे.

अखिलेश, राहुल, डिंपल, प्रियंका और जयंत चौधरी यह वो स्टार प्रचारक हैं जो भविष्य में महागठबंधन का भविष्य तय करेंगे. इसलिए प्रशांत किशोर जब मुलायम सिंह यादव से मिलने पहुंचे तो पीके के करीबियों ने साफ कर दिया कि भले ही अमर सिंह उनको लेकर मुलायम के पास गए हों और गाड़ी में साथ बैठे रहे हों पर सच्चाई यह है कि पीके को ज़िम्मा सिर्फ मुलायम सिंह यादव से मिलने का मिला था. इसलिए पीके जब मुलायम से मिलने पहुंचे तो अमर सिंह मुलायम सिंह की मर्सिडीज गाड़ी लेकर पीके के पास पहुंचे क्योंकि पीके मुलायम की भेजी उस गाड़ी में मिलने आ गए और उसके बाद पीके अकेले मुलायम की भेजी गाड़ी से ही वापस गए. तब अमर सिंह साथ नहीं थे और कुछ देर बाद वह गाड़ी पीके को छोड़कर वापस आ गई.

कुल मिलाकर आरएलडी कांग्रेस समाजवादी पार्टी और छोटे छोटे दलों को मिलाकर अखिलेश के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महागठबंधन की तैयारी तेज हो चली है. बस राहुल और कांग्रेस चाहते हैं कि अखिलेश नीतीश की भूमिका में हो जैसे नीतीश ने लालू कांग्रेस के बीच फैसला कर दिया वैसे ही फैसला करने की सूरत में अखिलेश आ जाए.

सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर ने आमने-सामने की बातचीत में मुलायम सिंह यादव से दो टूक कहा की बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाकर और अखिलेश के चेहरे को आगे रख कर बीजेपी को रोका जा सकता है. वरना लड़ाई अगर बीजेपी और बीएसपी की हुई तो सपा का यादव मतदाता भी मायावती को रोकने के लिए बीजेपी के पास चला जाएगा और मुस्लिम मतदाता आपको लडाई में बाहर देख कर मायावती के पास चला जाएगा. इसलिए आप महागठबंधन बनाइए अखिलेश को चेहरा बनाइए, छोटे-छोटे तमाम दलों को साफ लीजिए और मैं उम्मीद करता हूं बिहार की तर्ज पर बीजेपी सत्ता से बाहर होगी और महागठबंधन जीतेगा.

बात सीधी है कि पीके और मुलायम की मुलाकात में साफ हो गया कि कांग्रेस शीला के प्लान से बैकफुट पर आ चुकी है और अखिलेश को नेता मान चुकी है. लेकिन वह इंतजार कर रही है कि अखिलेश हैसियत के लिहाज से यूपी में वही भूमिका निभाएं जो बिहार में नीतीश ने निभाई. इसलिए राहुल के रणनीतिकार भले ही अमर सिंह की गाड़ी में गए हो लेकिन उनकी मुलायम से मुलाकात अकेले में हुई. यह बात सियासी गलियारों में हलचल पैदा करेगी और बता देगी कि मुलायम, अखिलेश के लिए राहुल गांधी के इशारे पर पीके की सलाह पर आगे बढ़ना चाहते हैं. इसलिए मुलाकात मुलायम और पीके की हुई. उस घर में मौजूद अमर सिंह उस पूरी मुलाकात में शामिल नहीं थे.

उत्तर प्रदेश की राजनीति की सियासत के सियासी फलक पर नया सियासी पता लिखा जा रहा है. लेकिन जो दिख रहा है वह हो नहीं रहा. अखिलेश राहुल करीब आना चाहते हैं, मुलायम सिंह तैयार है. लेकिन मुलायम अमर सिंह और शिवपाल को तवज्जो देना चाहते हैं. वही राहुल, अमर सिंह, शिवपाल और मुलायम को बिहार की तर्ज पर लालू यादव की तर्ज पर हुए समझौते की तरह साथ रखना चाहते हैं. इसलिए भले ही मुलायम और अमर सिंह साथ रहे हों, लेकिन पीके के करीबियों ने साफ कर दिया कि गाड़ी अमर सिंह की नहीं मुलायम की थी और बातचीत अमर सिंह से नहीं मुलायम सिंह से हुई.

इसलिए आप थोड़ा इंतजार कीजिए उस वक्त का, जब अखिलेश नीतीश की भूमिका में आएंगे. अमर सिंह और शिवपाल साइड हो जाएंगे. क्योंकि कांग्रेस और राहुल अखिलेश में नीतीश और मुलायम में लालू देखना चाहते हैं. इस सूरत में अखिलेश राहुल-प्रियंका डिंपल और जयंत चौधरी की नौजवान टीम मैदान में उतर जाएगी. पर ख्याल रखिए यह वही है जो देखा जा रहा है धरातल पर इसका उतारना बाकी है. उसका इंतजार है क्योंकि इसमें बहुत सारे इफ एंड बट बाकी है.

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