अगर ज़ंग हुई तो अंजाम क्या होगा यह इजरायल को भी पता नहीं!

अगर ज़ंग हुई तो अंजाम क्या होगा यह इजरायल को भी पता नहीं!
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यदि यह युद्ध शुरु हो गया तो उसका क्या अंजाम होगा यह इस्राईली अधिकारियों को पता नहीं है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में यह भी कहा कि इलाक़े के राष्ट्रों के ख़िलाफ़ पश्चिम की साम्राज्यवादी शक्तियों ने जो युद्ध छेड़ा यहूदी उसके ईंधन बन गए और आज भी वह अमरीका की नीतियों के ईंधन का काम कर रहे हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह का कहना था कि ज़ायोनी विचारधारा ने यहूदियों के मुद्दे को अपने अवैध स्वार्थ पूरे करने के लिए प्रयोग किया है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने यहूदियों को संबोधित करते हुए कहा कि नेतनयाहू सरकार यहूदी जनता को विध्वंस और विनाश की ओर ले जा रही है और नेतनयाहू की मूर्खतापूर्ण नीतियों की क़ीमत यहूदी जनता को चुकानी पड़ेगी। इसलिए कि इस्राईली प्रधानमंत्री और अन्य अधिकारियों को यह अंदाज़ा ही नहीं है कि युद्ध शुरू हो जाने की स्थिति में उनके सामने क्या हालात होंगे।

सैयद हसन नसरुल्लाह द्वारा कही गई इन बातों की झलक इस्राईली अख़बार में छपने वाले वरिष्ठ इस्राईली टीकाकार आरी शावीत के के लेख में बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इस लेख का शीर्षक है कि इस्राईल अपनी आख़िरी सांसें ले रहा है और यह विषय इस्राईली अधिकारियों की नींद हराम किए हुए है।

लेखक का कहना है कि इस्राईली अपनी नीतियों के कारण एसे बिंदु पर पहुंच गया है कि उसके लिए ख़ुद को बचा पाना असंभव हो गया है। शावीत ने अपने लेख में लिखा है कि यदि यही हालत है तो इस्राईल में रहने का कोई मज़ा ही नहीं है, अब इस धरती को छोड़ कर हमें चला जाना चाहिए। हमें बरलिन या सैन फ़्रांसिस्को लौट जाना चाहिए जहां से हम अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन आए थे।

लेखक का कहना है कि इस्राईलियों के पास एक ही रास्ता बचा है कि वह फ़िलिस्तीनियों को इस धरती का मालिक मानें और उनसे बात करें उनसे अपने भविष्य के बारे में बात करें।

शावीत ने लिखा कि हम सारे ही लोग अन्य देशों निकल कर जब से फ़िलिस्तीन में बसे हैं यह विचार हमें बार बार सताता है कि ज़ायोनी विचारधारा ने एक झूठ गढ़ा और उसी के सहारे उसने हम सब को फंसाया। इस धरती पर फ़िलिस्तीनियों की जड़े बहुत गहरी हैं और यह सच्चाई हर किसी को माननी ही पड़ेगी। हम इस सच्चाई से भाग नहीं सकते।

साभार- ‘parstoday. com’

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