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देश की कुल जीडीपी का करीब 71% तक कालाधन! तो अब अर्थवयवस्था का हस्र क्या होगा

दिल्ली : विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, देशभर में ब्लैक मनी का कारोबार देश की कुल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का तीन गुना है. कालेधन पर सरकार की 1000 पेज की सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, देश की कुल अर्थव्यवस्था (जीडीपी) का करीब 71 फीसदी तक कालाधन है। इसके हिसाब से करीब 2000 अरब डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था के समानांतर 1400 अरब डॉलर का कालेधन का कारोबार है। इन आंकड़ों को अगर रुपये में देखें तो 120 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था के समानांतर 83 लाख करोड़ रुपये का कालेधन का कारोबार है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी की कालेधन पर एक रिपोर्ट भी आ चुकी है।

अब देखा जाये तो 1000 और 500 के नोट बैन होने के बाद देश की अर्थवयवस्था जिसमें काले धन 71 फीसद होने का अनुमान लगाया गया है तो अगर सच में 71 फीसद हमारी अर्थवायसथा में छुपी हुई है तो ये देश की अर्थवयवस्था को बैलेंस करना सरकार के लिए एक चैलेंज है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट के बाद सोना, हीरे और गहने कालेधन के बड़े स्रोत हैं। सोने में कालेधन का आकलन थोड़ा मुश्किल है क्योंकि यह अंदाजा लगाना कठिन है कि लोगों के घरों में जेवरात या ठोस रूप में कितना सोना है। हीरे के कारोबार और बाजार में भी करीब करीब यही स्थिति है। हवाला के जरिए भी सोने और हीरे का काला कारोबार होता है।

रिपोर्ट यह भी कहती है कि कई बार मुख्य धारा के बैंक भी हवाला के जरिए सोने के काले कारोबार का हिस्सा बन जाते हैं, जिसे रोकने का कोई तरीका नहीं है। शेयर बाजार में डब्बा कारोबार भी काली कमाई का बहुत बड़ा जरिया है। सेबी और रिजर्व बैंक जैसे रेगुलेटरी अथॉरिटी के तमाम प्रयासों के बावजूद इस पर रोक मुमकिन नहीं हो पाई है। खनन क्षेत्र में भी सालाना करीब 10 फीसदी काला कारोबार होता है। कर्नाटक और गोवा में खनन क्षेत्र में सामने आए घोटालों से पता चला है कि लौह अयस्क बिना हिसाब किताब के सीधे निर्यात कर दिए जाते हैं।

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