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अगर 8 हफ्ते में कार्य नहीं किया तो सरकार होगी भंग- हाईकोर्ट

नई दिल्ली: उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गंगा नदी के मामले मे एक चौकाने वाला अल्टीमेटम दिया है। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने गंगा नदी को भारत की पहली लिविंग पर्सन अर्थात ​जीवित मनुष्य की संज्ञा दी है। इससे पहले विश्व में न्यूज़लैण्ड ही एक मात्र ऐसा देश है, जिसने वहां की नदी को लीविंग पर्सन का दर्जा दिया है। दरअसल उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने ​अतिविशिष्ट शक्ति अनुच्छेद 365 के तहत राज्य सरकार को 8 हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। अगर राज्य सरकार ने अपनी ज़िम्मदारियों को पूरा नहीं किया तो हाईकोर्ट राज्य सरकार को भंग कर सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को गंगा और यमुना नदी को मनुष्य की तरह सारे अधिकार ​​देने चाहिए। ये पहली बार है जब देश में किसी न्यायालय ने नदियों के मामले में इस तरह का फैसला सुनाया है।


गंगा नदी को देश में कितना सम्मान प्राप्त है ये बात सभी को पता है। हिन्दू शास्त्रों में गंगा नदी को मोक्ष दायिनी कहा ​जाता है। अपने उद्गम स्थल पर गंगा नदी इतनी स्वच्छ और निर्मल है कि अगर एक सिक्का भी उसमें गिर जाए तो उसे ​साफ देखा जा सकता है। लेकिन गंगोत्री से निकलने वाली गंगा जब उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल होते हुए जब बंगाल की खाड़ी में गिरती है तो कई प्रदेशों की गंदगी लेते हुए चली जाती है।गंगा नदी को माता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन गंगा को मां कहने वाली उसकी संतान ने सिर्फ उसके साथ राजनीति से बढ़कर कोई ठोस कार्य नहीं किया। गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए मौजूदा केन्द्र सरकार ने एक मंत्रालय तक गठित कर दिया। नमामी गंगे परियोजना शुरू किया गया लेकिन अपने ही कार्यो में ​पार​दर्शिता और निपुणता दिखाने में सभी अधिकांश सरकारे नाकाम रही हैं।
(शम्स तबरेज़, सियासत न्यूज़ ब्यूरो)

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