Sunday , December 17 2017

अग्नी 5 की कामयाबी में ख़ातून साईंसदाँ का अहम रोल

साईंसदानों के लिए अग्नी 5 मीज़ाईल की कामयाब परवाज़ एक चैलेंज से कम नहीं थी। ख़ातून साईंसदाँ टीसी थॉमस जो अपने ख़ानदान के लिए एक बेहतरीन ख़ानादार ख़ातून है और अग्नी पुत्री के नाम से मशहूर हैं। इस कारनामा के पसेपर्दा ख़ातून हैं जिनके मीज़ा

साईंसदानों के लिए अग्नी 5 मीज़ाईल की कामयाब परवाज़ एक चैलेंज से कम नहीं थी। ख़ातून साईंसदाँ टीसी थॉमस जो अपने ख़ानदान के लिए एक बेहतरीन ख़ानादार ख़ातून है और अग्नी पुत्री के नाम से मशहूर हैं। इस कारनामा के पसेपर्दा ख़ातून हैं जिनके मीज़ाईल टैक्नोलोजी के शोबा में कारनामों ने अग्नी 5 की कामयाब परवाज़ को मुम्किन बना दिया।

इस मीज़ाईल की परवाज़ का मंसूबा एलेप्पी (केरला) में शुरू हुआ जबकि उसूर इंजीनीयरिंग कालेज की बीटेक डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने मीज़ाईल की कामयाब परवाज़ के लिए एक बिलकुल नई टैक्नोलोजी ईजाद की, जिसने आज की कामयाबी मुम्किन बना दी। वो तालीम की तकमील के बाद डी आर डी ओ में 20 साल क़ब्ल मुलाज़िम हुई थीं और उन्होंने री एन्ट्री व्हीकल सिस्टम तैयार की है, जिस के ज़रीया मीज़ाईल तूफ़ानी रफ़्तार से फ़िज़ा में परवाज़ कर सकता है और 3 हज़ार दर्जा सेल्सियस हरारत होगी, बर्दाश्त कर सकता है।

इसके बावजूद इसके कंट्रोल सिस्टम बिलकुल दुरुस्त हालत में रहते हैं। उन्होंने जुलाई 2006 में मीज़ाईल की 75 सेकेंड की परवाज़ का कामयाब तजुर्बा किया था, लेकिन मीज़ाईल अचानक बेक़ाबू हो गया। इसलिए उन्होंने अपनी टेक्नोलोजी मज़ीद बेहतर बनाई और आज का तजुर्बा मुकम्मल तौर पर कामयाब साबित हुआ।

वो आज 400 साईंसदानों की इंचार्ज हैं, जिन में से बेशतर मर्द हैं। लेकिन इससे टीसी थॉमस को कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि साईंसदानों ने सिनफ़ की बुनियाद पर नहीं बल्कि मौज़ू की बुनियाद पर फ़र्क़‍ ओ‍ इम्तियाज़ किया जाता है क्योंकि साईंस में इसी की एहमीयत होती है।

TOPPOPULARRECENT