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अझरधाम मामले में रिहाई के खिलाफ गुजरात सरकार सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया

गुजरात सरकार ने 2002 के अक्षरधाम आतंकवादी हमले के मामले में बरी किए गए छह लोगों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल उस अर्जी का विरोध किया है जिसमें गलत तरीके से की गई गिरफ्तारी के लिए मुआवजे की मांग की गई है। राज्य सरकार ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि जांच एजंसियों पर इसका गंभीर मनोबल तोड़ने वाला प्रभाव पड़ेगा। गुजरात सरकार ने कहा कि चूंकि निचली अदालत के साथ-साथ गुजरात हाई कोर्ट ने आतंकवादी हमले में उनकी कथित भूमिका के लिए उन्हें दोषी करार दिया था, इसलिए उनकी निजी आजादी में कटौती, जिसका वे दावा कर रहे हैं, की बात स्वीकार नहीं की जा सकती। अक्षरधाम आतंकी हमले में 32 लोग मारे गए थे। 16 मई, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया था। इनमें तीन को हाई कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष की कहानी हर कदम पर दम तोड़ती है। अपने हलफनामे में गुजरात सरकार ने कहा कि जांच एजंसी ने विशेष पोटा अदालत की ओर से दोषी करार दिए गए इन छह लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर कर कानून का पालन किया था। हाई कोर्ट ने भी उन्हें दोषी करार देने के फैसले को बरकरार रखा था। हलफनामे में कहा गया है कि जब अधिकार क्षेत्र वाली दो अदालतों ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ इकट्ठा किए गए सबूतों को माना था और याचिकाकर्ताओं को दोषी पाए जाने का फैसला दिया था, तो कानून के मुताबिक याचिकाकर्ताओं की निजी आजादी में कटौती की बात स्वीकार नहीं की जा सकती।

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