‘अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला, PAC के सामने पेश किया जाये ‘- खड़गे

‘अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में  झूठ बोला, PAC के सामने पेश किया जाये ‘- खड़गे

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राफले सौदे की जांच की मांग करने वाली याचिकाओं को खारिज करने के बाद वह सीएजी रिपोर्ट विवाद का विषय बनती जा रही है जिसका हवाला देते हुए अदालत ने सरकार को क्लीन चिट दी थी. सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने अपनी 29-पेज के फैसले में कहा गया है कि राफेल सौदे की कीमत की जानकारी लोक लेखा समिति (पीएसी) के साथ साझा की गई थी, लेकिन पीएसी अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को कहा कि उन्होंने ऐसी रिपोर्ट नहीं देखी है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला है. खड़गे ने कहा कि वह पीएसी से आग्रह करेंगे कि वह अटॉर्नी जनरल और सीएजी को बुलाकर यह पूछें कि वह सीएजी कब और कहां से आयी. खड़गे का कहना है कि सरकार के इसी झूठ की वजह से ऐसा फैसला आया है.

 

शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कॉग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा ”सुप्रीम कोर्ट को गलत तथ्य देने के लिए सरकार जिम्मेदार है. मुझे लगता है कि अटॉर्नी जनरल को पीएसी से पहले बुलाया जाना चाहिए और पूछा जाए कि गलत तथ्यों को क्यों प्रस्तुत किया गया. यह एक बहुत ही गंभीर मामला है.”

भारत के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ द्वारा दिए गए अपने 29 पन्नों के फैसले में कहा गया राफले के मूल्य निर्धारण विवरण का उल्लेख भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) के साथ साझा किया गया है, जिसने यह रिपोर्ट सार्वजनिक लेखा समिति (पीएसी) के साथ साझा की है. दूसरी ओर पीएसी के चेयरमैन मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि ऐसी कोई रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है और सीएजी इसके बारे में भी नहीं जानता.”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इसके बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा: “मुझे लगता है कि खरीद प्रक्रिया से जुड़े फैसले के हिस्सों या निर्देशों पर हमें टिपण्णी करने का कोई अधिकार नहीं है. अगर उस संबंध में कुछ करने की आवश्यकता है, मुझे लगता है कि वकील इसकी जांच करेंगे और जरूरी काम करेंगे”.

सुप्रीम कोर्ट खंडपीठ ने अपने फैसले में पृष्ठ 21 पर के पैरा 25 में कहा “हमारे सामने रखी गई सामग्री से पता चलता है कि सरकार ने संसद में विमान की मूल कीमत के अलावा मूल्य निर्धारण के विवरण का खुलासा नहीं किया क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन होगा और मूल्य निर्धारण की जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है”.

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