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अडवानी वही काट रहे हैं जो उन्होंने बोया था ! कांग्रेस का रद्द-ए-अमल

नई दिल्ली 10 जून: कांग्रेस लीडर दिग विजय सिंह ने आज कहा कि वो सीनियर बी जे पी लीडर एल के अडवानी से दिल्ली हमदर्दी महसूस करते हैं जो बी जे पी के क़ौमी आमिला मीटिंग में ख़राबी सेहत की वजह से शिरकत नहीं करसके थे।

नई दिल्ली 10 जून: कांग्रेस लीडर दिग विजय सिंह ने आज कहा कि वो सीनियर बी जे पी लीडर एल के अडवानी से दिल्ली हमदर्दी महसूस करते हैं जो बी जे पी के क़ौमी आमिला मीटिंग में ख़राबी सेहत की वजह से शिरकत नहीं करसके थे।

अडवानी की अदम शिरकत को बहाना बनाते हुए कांग्रेस ने बी जे पी को मुसलसिल तन्क़ीदों का निशाना बनाया है। दिग विजय‌ सिंह ने बी जे पी को गैर शुक्र गुज़ार पार्टी भी क़रार दिया जिस ने अडवानी की मुख़ालिफ़त के बावजूद मोदी को चुनाव मुहिम कमेटी का सदर नशीन बनादिया है।

दिग विजय‌ सिंह ने अपने ट्वीटर पर तहरीर किया हैके वो अडवानी से दिल्ली हमदर्दी महसूस करते हैं। उन्होंने बी जे पी को लोक सभा में 2 नशिस्तों से 182 नशिस्तों तक पहूँचा दिया है ताहम बी जे पी एक गैर शुक्र गुज़ार पार्टी है जिस में इख़तेलाफ़ात वाज़िह हैं।

इस सवाल पर कि आया मोदी को चुनाव मुहिम कमेटी का सदर नशीन बनाए जाने के बाद क्या उन्हें वज़ारत अज़मी उम्मीदवार भी बनाया जा सकता है दिग विजय‌ सिंह ने कहा ये फैसला करना बी जे पी का काम है।

मोदी के तक़र्रुर से मुताल्लिक़ सवाल पर उन्होंने कहा कि वो इस तक़र्रुर पर मोदी को मुबारकबाद देते हैं। बी जे पी में दाख़िली इख़तेलाफ़ात पर तन्क़ीद करते हुए मर्कज़ी वज़ीर राजीव शुक्ला ने कहा कि जब बी जे पी अपने 10 क़ाइदीन को आपस में मुत्तहिद नहीं रख सकती है तो फिर वो एक हुकूमत में वुज़रा को किस तरह मुत्तहिद रख कर काम करवा सकती है।

अडवानी पर तन्क़ीद करते हुए कांग्रेस तर्जुमान शकील अहमद ने कहा कि बी जे पी लीडर आज वही काट रहे हैं जो उन्होंने बोया था। उन्होंने कहा कि अडवानी ने मुल्क में फ़िर्का परस्त सियासत की शुरूआत की थी और आज मोदी ने ख़ुद को उन से बड़ा फ़िर्का परस्त साबित करदिया है।

यही वजह हैके अडवानी को बी जे पी में नज़रअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आप जो कुछ बूते हैं वही काटते हैं। उन्होंने हिन्दुस्तानी सियासत में फ़िर्कापरस्ती का बीज बोया था और उन से ज़्यादा फ़िर्का परस्त शख़्स ने उनकी जगह ले ली।

ट्वीटर पर उन्होंने तबसरा किया कि अडवानी ने अपने ब्लॉग में कहा था कि आप को अपने गुनाहों की सज़ा दुनिया ही में भगती पड़ती है तो क्या ये 2002 में मोदी को बचाने का पछतावा था ?।

समझा जाता हैके अडवानी ने 2002 में मोदी को चीफ मिनिस्टर गुजरात की हैसियत से बरक़रार रखने में अहम रोल अदा किया था जब अटल बिहारी वाजपाई उन्हें इस ओहदे से बेदखल करदेना चाहते थे।

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