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अदालत ने औरत के बयान बदलने के बाद रेप मामले में शख्स को बरी किया

न्याय यात्रा

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने एक शख्स को एक औरत के साथ इस्मात्दरीऔर उसे मुजरिमाना धमकी देने के इलज़ाम से तब बरी कर दिया जब औरत ने अदालत से कहा कि उनके तुआलुक आपसी सहमति से बने थे और मामला दोनों के बीच हुए झगड़े का नतीजा था।एडिशनल सेशन जज वीरेंद्र भट्ट ने द्वारका के रहने वाले शख्स को इल्जामों से तब बरी कर दिया जब औरत ने अदालत से कहा कि उसने दोनों के बीच झगड़े के बाद शिकायत दर्ज की थी।अदालत ने कहा, ‘‘यह देखा गया कि शिकायत करने वाले ने इस्तगासा के मामले के पूरी तरह उलट बयान दिए हैं। उसकी गवाही के मुताबिक उसके और मुजरिम के बीच आपसी सहमति से जिस्मानी तालुकात बने जिसकी उसके पति को जानकारी नहीं थी। उसने खास तौर पर कहा कि मुलजिम ने उसके साथ न तो इस्मत्दरी किया और न ही गैर मामूली जिस्मानी हरकत किया।’’उसके बयान के आधार पर अदालत ने मामले में और सुनवाई की जरूरत न समझते हुए मुजरिम को बरी कर दिया। औरत ने शख्स पर इस्मात्दरी का और मोबाइल फोन पर उसकी फहश तस्वीरें लेने का इलज़ाम लगाया था।बाद में मुजरिम के खिलाफ आईपीसी की दफा 376 (इस्मत्दरी ), 377 (गारी मामूली जिस्मानी फेल ), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 506 (मुजरिमाना धमकी) के तहत इलज़ाम लैटर दर्ज किया गया।

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