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अनीसुल ग़ुरबा में लूट खसूट का मुआमला

हैदराबाद 19 मार्च - आंध्र प्रदेश स्टेट वक़्फ़ बोर्ड ने यतीम और यसीर तलबा का हक़ मारने के इल्ज़ाम में अनीसुल ग़ुरबा के दो मुलाज़मीन को मुअत्तल कर दिया है । इन में अनीसुल ग़ुरबा से चावल के दो थैले और गोश्त अपने घर मुंतक़िल करने वाला म

हैदराबाद 19 मार्च – आंध्र प्रदेश स्टेट वक़्फ़ बोर्ड ने यतीम और यसीर तलबा का हक़ मारने के इल्ज़ाम में अनीसुल ग़ुरबा के दो मुलाज़मीन को मुअत्तल कर दिया है । इन में अनीसुल ग़ुरबा से चावल के दो थैले और गोश्त अपने घर मुंतक़िल करने वाला मीर अकबर अली क्लर्क भी शामिल है जब कि इस यतीम ख़ाने के कैशियर मुहम्मद इसहाक़ को भी मुअत्तल कर दिया गया है ।

सियासत में नुमाइंदा ख़ुसूसी की अनीसुल ग़ुरबा में लूट खसूट से मुताल्लिक़ रिपोर्ट की इशाअत के फ़ौरी बाद सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड मौलाना ख़ुसरो पाशाह , चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर एम ए हमीद फ़ौरी हरकत में आ गए थे और हफ़्ता को ही वक़्फ़ बोर्ड की एक टीम ने जो सी ई ओ की क़ियादत में वहां पहूँची थी । सारे रेकॉर्ड बाशमोल रसायद को ना सिर्फ़ ज़ब्त कर लिया था बल्कि अलमारियों को भी मोहरबंद कर दिया गया था ।

इस मौक़ा पर वक़्फ़ बोर्ड की टीम को 12564 रुपये की नक़द रक़म भी हाथ लगी थी । आज दफ़्तर रियासती वक़्फ़ बोर्ड में अनीसुल ग़ुरबा जैसे यतीम ख़ाने में हो रही बे क़ाईदगियों और यतीम और यसीर तलबा के लिए भेजे जाने वाले ग़िज़ाई अजनास और दीगर सामान और एतियात की लूट खसूट के ताल्लुक़ से सदर नशीन बोर्ड की क़ियादत में ख़ुसूसी इजलास मुनाक़िद हुआ जिस में असल मुल्ज़िम मीर अकबर अली साकिन फ़लकनुमा और कैशियर मुहम्मद इसहाक़ को मुअत्तल करने का फैसला किया गया।

सैयद अली अहमद ने बताया कि गुजिश्ता साल 6 क्विंटल चावल ज़ाए हो गया था और उसे फेंकना पड़ा था जिस के बाइस उन लोगों ने ये फैसला किया था कि चूँकि स्टाफ़ की तनख़्वाहें कम हैं इस लिए अरकान अमला को 375 रुपये रियायती कीमतों पर एक थैला चावल दिया जाएगा क्यों कि बाअज़ मर्तबा ज़रूरत से ज़्यादा चावल जमा हो जाता है ।

सैयद अली अहमद फ़ी मुलाज़िम एक थैले की बात कर रहे हैं लेकिन मीर अकबर अली पैसेंजर ऑटो में चावल के दो थैले और गोश्त लेकर जा रहा था अब यहां ये सवाल पैदा होता है कि ई ओ अनीसुल ग़ुरबा और दीगर मुलाज़मीन को आपस में चावल तक़सीम करने का फैसला लेने का हक़ किस ने दिया था । अगर स्टाफ़ की तनख़्वाहें नाकाफ़ी यह कम हों तो वो वक़्फ़ बोर्ड से शिकायत कर सकते थे ।

इस तरह यतीमों का माल हड़पना मज़हबी और समाजी एतबार से गुनाह और जुर्म है । दूसरी जानिब इस बात का भी इन्किशाफ़ हुआ है कि वक़्फ़ बोर्ड हक़ इंतिज़ामी के तहत अनीसुल ग़ुरबा की 31 फ़ीसद रक़म हासिल कर लेता है और साल 2012-13 के दरमियान अनीसुल ग़ुरबा यतीम ख़ाने के अकाउंट से वक़्फ़ बोर्ड ने 6 लाख रुपये निकाले ।

यहां ये सवाल पैदा होता है कि वक़्फ़ बोर्ड इस यतीम ख़ाने से आख़िर 31 फ़ीसद रक़म क्यों हासिल करता है जब कि वो इस रक़म या इज़ाफ़ी चावल गोश्त, रक़म और दीगर अशिया की दूसरे यतीम ख़ानों या मदारिस में तक़सीम अमल में ला सकता है । ऐसा लग रहा है कि वक़्फ़ बोर्ड यतीम ख़ाना से कफ़ाफ़ वसूल कर रहा हो ।

इसी दौरान सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड मौलाना सैयद ख़ुसरो पाशाह ने सियासत को बताया कि अनीसुल ग़ुरबा के ई ओ सैयद अली अहमद से वज़ाहत तलब की गई है । ज़राए का कहना है कि उन से इस बात की वज़ाहत करने के लिए कहा गया है कि वो किस हैसियत से अरकान अमला को चावल रियायती कीमतों पर फरोख्त कर रहे थे।

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