अपनी मांगों को लेकर दिल्ली बॉर्डर तक पहुंचे हजारों किसान, डालेंगे किसान घाट पर महाघेरा

अपनी मांगों को लेकर दिल्ली बॉर्डर तक पहुंचे हजारों किसान, डालेंगे किसान घाट पर महाघेरा

किसानों-मजदूरों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संगठन के नेतृत्व में हजारों किसान आज नोएडा से दिल्ली की कूच कर दिया. हजारों की संख्या ये किसान अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर मोदी सरकार के सामने रखने के लिए सहारनपुर से पैदल यात्रा करते हुए आ रहे हैं.

नोएडा से दिल्ली की ओर कूच रहे किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी में है. हालांकि उसके पहले ही दिल्ली पुलिस ने पूरी तैयारी शुरू कर रखा है कि वह किसानों को दिल्ली जाने से रोक सकें. दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर दिल्ली पुलिस ने अपने जवानों को तैनात कर दिए हैं. सीआरपीएफ के जवानों को भी यहां लगाया गया है. फ्लाई ओवर के ऊपर और नीचे सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात कर दिए गए हैं.

इससे साफ जाहिर है कि दिल्ली पुलिस पूरी कोशिश करेगी दिल्ली की तरफ किसान ना बढ़ सके. जबकि किसान नोएडा के ट्रांसपोर्ट नगर से शनिवार की सुबह दिल्ली कूच के लिए रवाना हुए हैं. ऐसे में दिल्ली पुलिस की तैयारी कहीं ना कहीं इशारा करती है कि किसानों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो सकता है. पिछले साल किसानों और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव हो चुका है.

भारतीय किसान संगठन के उपाध्यक्ष राधे ठाकुर ने aajtak.in से बातचीत करते हुए बताया कि सहारनपुर से दिल्ली के लिए निकली ‘किसान-मजदूर यात्रा’ में हजारों किसान शामिल हैं. सहारनपुर से दिल्ली के किसान घाट तक पैदल यात्रा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में किसानों की हालत दयनीय है और किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ रखे सो रही है.

उन्होंने  कहा कि समय से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो रहा. योगी सरकार बिजली की दर बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ रही है और कर्ज के चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं. इसी के चलते देश के किसान को दिल्ली पैदल आने के लिए मजबूर होना पड़ा है. जब तक किसानों की मागों के बारे में सरकार कोई ठोस आश्वासन नहीं देती तब तक किसान दिल्ली छोड़ने वाले नहीं हैं. भले ही हमें जितने दिनों तक दिल्ली में पड़ाव करना पड़े.

उन्होंने ने कहा कि सरकार तो सरकार है लेकिन विपक्ष भी किसानों को लेकर गंभीर नहीं है. विपक्ष के निष्क्रिय होने के कारण किसानों को खेती का काम छोड़कर सड़कों पर आने को विवश होना पड़ रहा है. हालांकि उन्होंने कहा कि विपक्ष दलों में से महज राष्ट्रीय लोकदल ने ही समर्थन किया है और अपने प्रतिनिधिमंडल को भी भेजा है. इसके अलावा बाकी दलों को कोई समर्थन नहीं मिला है.

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