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अपने हक़ों की लड़ाई के लिए हाज़ी अली दरगाह के खिलाफ उतरीं मुस्लिम महिलाएं।

मुंबई: दुनिया भर में मशहूर मुंबई  की हाजी अली दरगाह अपने मजहब की औरतों की तरफ से की जा रही मांग को लेकर काफी दवाब में है।  महिलाओं की मांग है की दरगाह के प्रबंधक दरगाह में बने पवित्र कमरे में महिलाओं के घुसने पर लगी पाबंदी को खत्म करे। अगर दरगाह का प्रबंधन करने वाली कमेटी ऐसा करने की इज़ाज़त दे देती है तो यह महिलाओं के लिए एक बड़ी जीत होगी जिस से देश भर की मुस्लिम महिलाओं में एक क्रान्ति फ़ैल जाएगी।

मामले को लेकर दरगाह कमेटी और  महिला अधिकारों के एक ग्रुप के बीच ठन गयी है।  आपको बता दें कि हाज़ी अली दरगाह न सिर्फ दुनिया भर से आने वाले मुस्लिम और गैर मुस्लिम लोगों में मश्हूर है बल्कि वहां हिन्दू भी बहुत बड़ी गिनती में रोज़ जाते हैं। महिलाओं के दरगाह के पवित्र कमरे में जाने पर रोक साल 2011 में लगी थी और इसके पीछे की वजह बताते हुए ट्रस्ट ने कहा था कि इस्लाम में किसी फ़क़ीर की समाधी के  नज़दीक जाना गुनाह माना जाता है।

इस फैसले के खिलाफ भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन नाम की एक संस्था ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्ज़ी याचिका दायर कर कहा है कि महिलाओं पर लगा बैन असंवैधानिक है और इसे हटाया जाना चाहिए।  संस्था की सह-संस्थापक नूरजहाँ निआज़ ने कहा कि “फैसला महिलाओं के हक़ में होने से औरतों की ज़िन्दगी में एक अच्छा बदलाव आएगा जो आगे चल कर उन्हें बहुत फायदा देगा। “

आपको बता दें कि हाज़ी अली दरगाह को 1430 के दशक में बनाया गया था था। एक छोटे से टापू पर बनी इस दरगाह को एक बहुत अमीर मुस्लिम की समाधी पर बनाया गया है जिसने अपनी सारी धन दौलत छोड़ दी थी और हज करने चले गए थे।

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