Friday , February 23 2018

अफ्रीकी देश मॉरीतानिया में अनोखा निकाह, मेहर के बदले दरूद शरीफ़ पढ़ने को कहा !

रियाद: इस्लामी शरीयत और फ़िक़्ही नियमानुसार हक़-ए-मेहर चीज़ ही की शकल में अदा किया जाता है मगर अफ़्रीकी देश मॉरीतानिया में इन दिनों एक अनोखे मेहर की चर्चा है जिस की गूँज सात समुद्र पार से सुनाई दे रही है।

अल अरबिया डॉट नेट के अनुसार मॉरीतानिया के एक नागरिक ने अपनी बेटी के अकद निकाह के बदले पैसा, सोना, चांदी, भूमि या संपत्ति नहीं मांगी बल्कि दूल्हे से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर एक लाख दरूद शरीफ भेजने की मांग की। दूल्हे ने यह अनोखा हक़-ए- मेहर अदा कर दिया जबकि दूल्हे के पिता का कहना है कि हक़-एमेहर (एक मिलियन दरूद पाक पढ़ने को) निकाह फार्म में दर्ज किया जाए।

गौरतलब है कि दूल्हा एक उच्च शिक्षित युवा है लेकिन उच्च शिक्षा होने के बावजूद वह बेरोजगार है। इस पर होने वाले ससुर ने उससे चीज़ के रूप में सही मेहर प्राप्त करने के बजाय दस लाख दरूद पाक पढ़ने की मांग की। दस लाख दरूद पाक पढ़ने के बदले में पिता अपनी बेटी के मेहर से दस्तबरदार हो गया।

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यह घटना मॉरीतानिया के स्थान नवाकशो्त की अलतरहील कॉलोनी में हाल ही में हुई। मेहर में ‘दरूद शरीफ़’ की खबर ने सोशल मीडिया पर एक तूफान मचा दिया है। लोग बढ़चढ़ कर इस घटना पर अपनी खुद की शैली और विचारों के अनुसार टिप्पणियां कर रहे हैं। जहां इस कदम की प्रशंसा की गई है वहीं उसके विरोधियों की भी कोई कमी नहीं है। विरोध करने वाले सज्जन उसे इस्लाम में ‘बिदअत’ करार दे रहे हैं कि सामाजिक स्तर पर इस का समर्थन करने वालों का कहना है कि यह कदम शादी की बाधाओं को दूर करने में मददगार हो सकता है। क्योंकि कई युवा आर्थिक रूप पर सक्षम न होने के कारण समय पर शादी नहीं कर पाते और उनकी शादी की उम्र बीत जाती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निकाह और मेहर के इस अद्वितीय दृष्टिकोण को अपनाने का भी मांग की है।

यह घटना मॉरीतानिया के स्थान नवाकशो्त की अलतरहील कॉलोनी में हाल ही में हुई। मेहर में ‘दरूद शरीफ़’ की खबर ने सोशल मीडिया पर एक तूफान मचा दिया है। लोग बढ़चढ़ कर इस घटना पर अपनी खुद की शैली और विचारों के अनुसार टिप्पणियां कर रहे हैं। जहां इस कदम की प्रशंसा की गई है वहीं उसके विरोधियों की भी कोई कमी नहीं है। विरोध करने वाले सज्जन उसे इस्लाम में ‘बिदअत’ करार दे रहे हैं कि सामाजिक स्तर पर इस का समर्थन करने वालों का कहना है कि यह कदम शादी की बाधाओं को दूर करने में मददगार हो सकता है। क्योंकि कई युवा आर्थिक रूप पर सक्षम न होने के कारण समय पर शादी नहीं कर पाते और उनकी शादी की उम्र बीत जाती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निकाह और मेहर के इस अद्वितीय दृष्टिकोण को अपनाने का भी मांग की है।

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