Saturday , December 16 2017

अबुल कलाम आज़ाद रिसर्च इंस्टीट्यूट , शाही मस्जिद बाग़ आम्मा की दो इमारतें इंतिहाई ख़सताहाल(खराब)

नुमाइंदा ख़ुसूसी - अबुल कलाम आज़ाद ओरियंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट वाक़ै अहाता शाही मस्जिद बाग़आम्मा जिस का क़ियाम तक़रीबा 58 साल कब्ल अमल में आया था गुज़श्ता कई बरसों से इस की सरगर्मियां ठप हैं । महिकमा अकलियती बहबूद ने शाही मस्जिद

नुमाइंदा ख़ुसूसी – अबुल कलाम आज़ाद ओरियंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट वाक़ै अहाता शाही मस्जिद बाग़आम्मा जिस का क़ियाम तक़रीबा 58 साल कब्ल अमल में आया था गुज़श्ता कई बरसों से इस की सरगर्मियां ठप हैं । महिकमा अकलियती बहबूद ने शाही मस्जिद के अहाता में दो इमारतें उस इदारा को माहाना एक रुपये किराया पर दी थीं ।

एक इमारत लाइब्रेरी और लेक्चर हाल के लिए और दूसरी इमारत रिसर्च की सरगर्मियों के लिए दी गई थी । लेकिन गुज़श्ता कई बरसों से यहां रिसर्च की सरगर्मियां ना होने के बराबर होगई हैं । चुनांचे कई मर्तबा इन इमारतों को मस्जिद के लिए हासिल करने की कोशिश की गई थी । असेंबली की वक़्फ़ कमेटी ने 1997 में शाही मस्जिद के मुआइना के बाद अपनी रिपोर्ट में बताया कि मस्जिद उस्मानिया अल-मारूफ़ मस्जिद बाग़ आम्मा 30 अगस्त 1984 -गज़्ट नोटीफ़ीकेशन के मुताबिक़ रजिस्टर्ड वक़्फ़ जायदाद है ।

13811 मुरब्बा गज़ पर वाक़ै मस्जिद हुकूमत आंधरा प्रदेश की तोलीयत(कबजे) में है । साबिक़ महिकमा इंडो मेनट इंतिज़ामीया के तहत इस के उमूर अंजाम दीए जाते थे । बाद में ये इंतिज़ामात महिकमा अकलियती बहबूद के हवाले कर दीए गए । असेंबली की कमेटी ने मस्जिद और इस के अतराफ़ इमारतों का मुआइना किया था । मस्जिद से मुत्तसिल(मिले हुवे) दो इमारतों में अबुल कलाम आज़ाद रिसर्च इंस्टीट्यूट और लाइब्रेरी क़ायम है ।

कमेटी को बताया गया है कि इन दो इमारतों पर गैर मजाज़ (गैर कानुनी)क़बज़ा है । चुनांचे असेंबली की कमेटी ने तहकीकात के बाद अपनी रिपोर्ट में रिसर्च इंस्टीट्यूट और लाइब्रेरी की दोनों इमारतों का तख़लिया करवा कर मस्जिद इंतिज़ामीया के हवाले करने की हुकूमत से सिफ़ारिश की थी । ताकि अपनी सरगर्मियों का आग़ाज़ किया जा सके । मस्जिद के बाअज़ मुस्लियों ने बताया कि अब जब कि हैदराबाद में मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी क़ायम होचुकी है ।

लिहाज़ा अबुल कलाम आज़ाद रिसर्च इंस्टीट्यूट की ज़रूरत अब बाक़ी नहीं रही । इस लाइब्रेरी से बराए नाम ही लोग इस्तिफ़ादा करते हैं । उन के लिए इन दो इमारतों को क़बज़ा में रखना गैर ज़रूरी है । इन इमारतों की बाक़ायदा देख भाल भी नहीं हो रही है । इमारत की छत मख़दूश(खराब) हो चुकी है जगह जगह से छत से गच्ची गिर रही है । और बारिश के अय्याम(दिनो) में पानी भी टपकता है जिस से इस में मौजूद किताबों के ख़राब होने का ख़दशा ज़ाहिर किया गया है ।

मुस्लियों के मुताबिक़ इमारत इतनी ख़सताहाल (खराब) होचुकी है कि किसी भी वक़्त मुनहदिम हो(गिर) सकती है । खिड़कियों के तमाम शीशे टूट चुके हैं । कभी इस का चूना पानी नहीं किया जाता । सफ़ाई का बिलकुल इंतिज़ाम नहीं है । बाग़ आम्मा के लोग इस से मुत्तसिल कचरा कूड़ा लाकर डालते हैं जब कि इन दो इमारतों का मुकम्मल मेनटननस उन्ही की ज़िम्मेदारी है । लाइब्रेरी के बहाने बाअज़ गैर मजाज़ अफ़राद नशा की हालत में मस्जिद के अहाता में आजाते हैं ।

मस्जिद का बैत उल-ख़ला ख़राब कर देते हैं उन्हें रोकने वाला कोई नहीं रहता । ज़ेर नज़र तस्वीर से दोनों इमारतों की ख़सताहाली(बरबादी) का अंदाज़ा लगाया जा सकता है । रिसर्च की इमारत में 15 हज़ार किताबों का ज़ख़ीरा मौजूद है । इंस्टीट्यूट के सेक्रेटरी ने सयासी सतह पर अपना असर-ओ-रसूख़ इस्तिमाल करते हुए इन इमारतों को अपने क़बज़ा में रखा है । इमारत से मुताल्लिक़ एक मुक़द्दमा भी वो हार चुके हैं ।

हम आप को बतादें कि ये दोनों इमारत किसी वक़्त में शाही मस्जिद का नियाज़ ख़ाना थीं । अब मस्जिद के मुस्लियों की ख़ाहिश है कि फ़ौरी तौर पर इन दोनों इमारतों को मस्जिद के हवाले कर दिया जाय ताकि यहां क़ुरआन-ओ-हदीस सैंटर क़ायम कर के दीनी सरगर्मी के लिए उन्हें इस्तिमाल किया जाय । और जुमा की नमाज़ के लिए भी उन्हें इस्तिमाल किया जाय क्यों कि बाग़ आम्मा की शाही मस्जिद पूरे शहर हैदराबाद में कई एतबार से अहमियत रखती है ।

मस्जिद इंतिहाई ख़ूबसूरत और पुर सुकून माहौल में है । इस लिए दूर दूर से लोग यहां नमाज़ पढ़ने के लिए आते हैं । चुनांचे जुमा के दिन मुस्लियों की कसरत की वजह से मस्जिद नाकाफ़ी होजाती है । इस लिए इन दो इमारतों को जो बिलकुल इस्तिमाल में नहीं आरही हैं मस्जिद के हवाले कर देना चाहीए ताकि इन में देनी सरगर्मियां जारी करदी जाएं ।

मस्जिद के मैनिजर जनाब यूसुफ़ ख़ां ने बताया कि अगर ये इमारतें मस्जिद के हवाले की जाती हैं तो मस्जिद के लिए बहुत बेहतर होगा । मस्जिद की ज़रूरत और असेंबली वक़्फ़ कमेटी की सिफ़ारिशात के पेश नज़र सेक्रेटरी कमेटी को चाहीए कि वो इंस्टीट्यूट की ये इमारतें मस्जिद के हवाले करदें ताकि दीनी सरगर्मियों से उन इमारतों को आबाद रखा जाय ।।

* शाही मस्जिद बाग़ आम्मा की दो इमारतें जो अबुल कलाम आज़ाद लाइब्रेरी और रिसर्च के लिए दी गई थीं इंतिहाई ख़सताहाल (खराब) , जगह जगह से छत से गच्ची गिर रही है ।और बारिश के अय्याम में पानी टपकने की वजह से किताबें ख़राब होने के क़वी इमकानात, और ये दोनों इमारतें अपने मक़सद में बिलकुल इस्तिमाल नहीं हो रही हैं ।

लिहाज़ा मुस्लियों का मुतालिबा है कि जल्द अज़ जल्द उन्हें मस्जिद के हवाले कर दिया जाय ताकि इन में क़ुरआन-ओ-हदीस सैंटर क़ायम किया जाय । और जुमा की नमाज़ के लिए भी इस्तिमाल किया जाएगा क्यों कि मस्जिद जुमा के दिन नाकाफ़ी होती है ।


* सेक्रेटरी कमेटी अपने सियासी असर-ओ-रसूख़ की वजह से उन इमारतों को अपने क़बज़ा में रखे हुए हैं जब कि असेंबली वक़्फ़ कमेटी ने भी इन को मस्जिद के हवाले करने की सिफ़ारिश की थी ।।

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