Sunday , December 17 2017

अबू मूसा तनाज़ा , अरब ममालिक को इरान की वार्निंग

ईरान ने ख़लीजी अरब रियास्तों को ख़बरदार किया है कि अगर उन्होंने ईरान और मुत्तहिदा अरब अमीरात के दरमयान मुतनाज़ा जज़ीरे के मुआमले पर मुहतात रद्द-ए-अमल इख्तेयार ना किया तो सूरत-ए-हाल इंतिहाई पेचीदा हो सकती है।

ईरान ने ख़लीजी अरब रियास्तों को ख़बरदार किया है कि अगर उन्होंने ईरान और मुत्तहिदा अरब अमीरात के दरमयान मुतनाज़ा जज़ीरे के मुआमले पर मुहतात रद्द-ए-अमल इख्तेयार ना किया तो सूरत-ए-हाल इंतिहाई पेचीदा हो सकती है।

वज़ीर-ए-ख़ारजा अली अकबर सालही ने इस बात का ऐलान दोहा में ख़लीज तआवुन कौंसल रियास्तों के दरमयान छोटे जज़ीरा अबू मूसा के मुआमले पर होने वाले मुज़ाकरात के मौक़ा पर ईरान के असना-ए-ख़बररसां इदारा से गुफ़्तगु करते हुए किया ।जज़ीरे पर यू ए ई और ईरान दोनों मिल्कियत का दावा करते हैं , सदर महमूद अहमदी नज़ाद ने गुज़श्ता बुध के रोज़ अबू मूसा जज़ीरे का दौरा और वहां तक़रीर करके यू ए ई को इश्तेआल दिलाया था ।

अहमदी नज़ाद का तक़रीर में कहना था कि तारीख़ी रिकार्डस साबित करते हैं कि ख़लीज-ए-फारिस , फ़ारस में है जबकि सरकारी मीडीया ने इस दौरे को ख़ालिस्तान अंदरूनी मुआमला क़रार दिया था। यू ए ई ने तेहरान से अपना सफ़ीर वापस बुला लिया था और अक़वाम-ए-मुत्तहिदा में इस दौरे के मुआमले पर एहतिजाज रिकार्ड कराया था इस ने ज़ोर दिया था कि सदीयों पुराने इलाक़ाई तनाज़ा को मुज़ाकरात या फिर आलमी अदालत इंसाफ़ में हल किया जाना चाहिए।

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