Monday , December 18 2017

अब्दुल कलाम मेरी और लाखों हिंदूस्तानियों की पसंद

सदारती इंतिख़ाब ( राष्ट्रपति चुनाव) के लिए ए पी जे अब्दुल कलाम की मुहिम को ऑनलाइन पर पहूँचाते हुए मग़रिबी बंगाल की चीफ मिनिस्टर और तृणमूल कांग्रेस की सदर ममता बनर्जी ने आज कहा कि सदारती इंतिख़ाब ( राष्ट्रपति चुनाव) के लिए उन की पसंद ला

सदारती इंतिख़ाब ( राष्ट्रपति चुनाव) के लिए ए पी जे अब्दुल कलाम की मुहिम को ऑनलाइन पर पहूँचाते हुए मग़रिबी बंगाल की चीफ मिनिस्टर और तृणमूल कांग्रेस की सदर ममता बनर्जी ने आज कहा कि सदारती इंतिख़ाब ( राष्ट्रपति चुनाव) के लिए उन की पसंद लाखों हिंदूस्तानियों की पसंद भी है ।

सोश्यल नेटवर्किंग साईट फेसबुक पर अपना खाते खोलते हुए उन्होंने अपने पहले पोस्ट में लिखा कि मैंने इस बात पर आवाज़ दी जो लाखों हिंदूस्तानी किसे सदर में देखना चाहते हैं । मिस बनर्जी ने अपने मौक़िफ़ (निश्च्य) में तबदीली से इनकार करते हुए कहा कि मेरी पार्टी एक छोटी जमात है ।

हमारी कोई बड़ी पार्टी नहीं है और ना ही हमारे पास ऐसे वसाइल (साधन) हैं जो चंद दूसरों के पास हैं हम अज़म-ओ-सदाक़त से रहनुमाई हासिल करते हैं और ज़िंदगी भर में अपने उसूलों पर कारबन्द रही हूँ । में अपने इख्तेयार कर्दा मौक़िफ़ ( निश्च्य) पर बदस्तूर अटल हूँ । उन्होंने कहा कि जम्हूरियत में अवाम की मर्ज़ी सब से बरतर-ओ-बालातर है ।

मिस बनर्जी ने अवाम से अपील की कि वो अपने मुंतख़ब ( चुने हुए) नुमाइंदों पर ज़ोर दें कि इस मौक़ा पर उठ खड़े हों और डाक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम की ताईद ( समर्थन) करें। मैं चाहती हूँ कि आप की आवाज़ की सुनवाई हो और मैं भी अवाम की पसंद-ओ-मर्ज़ी पर सिरे ख़म तस्लीम करती हूँ ।

ममता बनर्जी ने हिंदूस्तानी मीज़ाईल प्रोग्राम के बानी-ओ-मुअम्मार अब्दुल कलाम को एक ऐसा मुमताज़-ओ-क़ाबिल फ़ख़र सपूत हिंद ( हिंदुस्तान् का बेटा) क़रार दिया जो तमाम हिंदूस्तानियों को एक नई उमंग देते रहेंगे । मिस ममता बनर्जी ने कहा कि डाक्टर अब्दुल कलाम हमेशा तंगनज़र (अनुदार) सियासत से बालातर रहे हैं।

वो तालिब सदाक़त हैं । सरचश्मा‍ ए‍ इल्म हैं और एक ग़ैर जांबदार आवाज़ हैं । अल-मुख़्तसर वो ( अब्दुल कलाम ) एक ऐसे शख़्स हैं जिन्हें हमारे तमाम शहरी सदर बनाने की ख़ाहिश रखते हैं। वाज़िह रहे कि अब्दुल कलाम का नाम तजवीज़ करने के लिए ममता ने एस पी के सदर मुलायम सिंह से हाथ मिलाया था लेकिन उन्होंने ( सिंह ) बाद में यू पी ए उम्मीदवार परनब मुकर्जी की ताईद ( समर्थन) का ऐलान कर दिया ।

परनब के हक़ में मिलाज़ के अह्द वफ़ा के बाद ममता यक्का-ओ-तन्हा होकर रह गई हैं। ताहम (फिर भी) ममता बनर्जी अपने यक्का-ओ-तन्हा हो जाने की परवाह किए बगैर गुज़श्ता रात कहा था कि इन की पार्टी अब्दुल कलाम की नामज़दगी ( नियुक़्ती) के मौक़िफ़ ( निश्च्य) पर अटल है और हम अपनी मालना पसंद से इन्हिराफ़ (अवहेलना/ फिर नही रहे हैं) नहीं क ररहे हैं ।

मिस बनर्जी ने कहा कि हम मिस्टर कलाम की उम्मीदवारी पर बदस्तूर अटल हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपने तमाम साथी शहरियों से अपील करती हूँ कि वो भी डाक्टर कलाम की उम्मीदवारी पर ग़ौर करें ताकि उन ( कलाम ) जैसे रौशन ख़्याल और बावक़ार अस्हाब ( सम्मानित व्यक्ती) मुल़्क की क़ियादत कर सकें।

ममता बनर्जी ने फेसबुक पर अपने पहले पयाम के आख़िर में रविन्द्र नाथ टैगोर की नज़म के एक मक़बूल आम शेअर का हवाला दिया जिसका मफ़हूम (मतलब/ उद्देश्य/ भाव) ये है कि जहां ज़हन में कोई ख़ौफ़ नहीं होता सर बुलंद रहता है । उन्हों मज़ीद कहा कि आप लोगों की अक्सरियत की तरह मैं भी एक मामूली , शफ़्फ़ाफ़ (साफ सुथरी) और आम फ़र्द ( सामान्य इंसान) हूँ |

TOPPOPULARRECENT