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अब ईसाईयों को एक मख़सूस सियासी पार्टी का हमनवा बनाने की कोशिश

ठोस फ़लाही-ओ-तरक़्क़ियाती पालिसीयों पर जिन पार्टियों को यक़ीन नहीं होता वो शौब्दाबाज़ियों(gimmicks) पर तकिया करती हैं या फिर मज़हब का सहारा लेने लगती हैं। यों तो मज़हब का इस्तेमाल अब तक हिंदू और मुस्लिम सियासी क़ाइदीन करते आरहे थे और कर भी रहे

ठोस फ़लाही-ओ-तरक़्क़ियाती पालिसीयों पर जिन पार्टियों को यक़ीन नहीं होता वो शौब्दाबाज़ियों(gimmicks) पर तकिया करती हैं या फिर मज़हब का सहारा लेने लगती हैं। यों तो मज़हब का इस्तेमाल अब तक हिंदू और मुस्लिम सियासी क़ाइदीन करते आरहे थे और कर भी रहे हैं मगर इस मुल्क ख़ासकर रियासत आंध्र प्रदेश में ईसाईयों की आबादी में ग़ैरमामूली इज़ाफे के पेशे नज़र उस अक़लियती तबके को भी रिझाने और अपना हमनवा बनाए रखने की कोशिशें की जा रही हैं।

इस मर्तबा ईसाईयों के अहम तहवार क्रिसम‌स तैयारियों इस एहतिमाम के साथ की जा रही हैं कि उन्हें एक मख़सूस सयासी जमात के करीब करदिया जाये। ये एक हक़ीक़त है कि रियासत में अब ईसाई तबके ने एसा मौक़िफ़ हासिल करलिया है कि उन्हें कोई भी
सियासी पार्टी नज़रअंदाज नहीं करसकती मगर ये तबक़ा भी मुस्लमानों की तरह यक कुतुबी राय दही करने का रुजहान रखता है।

रियासत की एक सियासी पार्टी के कर्ता धर्ता भी इत्तेफ़ाक़ से ईसाई हैं और इस ख़ानदान के बारे में ईसाईयों और ईसाई मिशनरियों का ये मानना है कि ईसाईयत के फ़रोग़ में कलीदी किरदार रहा है। 2014 के आम इंतेख़ाबात में इंतिख़ाबी मैदान में हमे रुख़ी मुक़ाबला यक़ीनी है चूँकि कम अज़ कम चार अहम सियासी पार्टियां बरसर-ए-इक़तिदार कांग्रेस, असल अपोज़ीशन तेलगुदेशम, और साबिक़ चीफ मिनिस्टर डाक्टर वाई एस राज शेखर रेड्डी के फ़र्ज़ंद की क़ायम करदा वाई एस आर कांग्रेस के अलावा तेलंगाना में टी आर एस एक दूसरे से सख़्त मुक़ाबला करने की तैयारीयों में है जबकि बी जे पी भी कुछ हलक़ों में इंतेख़ाबी नताइज पर असरअंदाज़ होसकती है।

रियासत में सियासी सूरत-ए-हाल एसी है कि कुछ मख़सूस तबक़ात, पार्टियों की पालिसीयों और उम्मीदवारों के किरदार को मल्हूज़ रखे बगैर अपने अपने तबक़ात के उम्मीदवारों की कामयाबियों के जतन करते हैं। इसमें ईसाईयों को भी किसी एक मख़सूस पार्टी के हक़ में करदिया जाये तो इंतेख़ाबी नताइज को बड़ी हद तक अपने मुवाफ़िक़ किया जा सकता है।

यही वजह है कि अब कुछ सियासी क़ाइदीन ख़ुद को ईसाई और ईसाईयत का अलमबरदार साबित करने अपने हाथों में बाइबल थामे रख रहे हैं। मोतबर ज़राए से मालूम हुआ है कि एक सियासी ख़ानदान के दामाद जो ना सिर्फ़ आंध्र प्रदेश बल्कि बैरून मुल्क भी मसीही मबलग़ की हैसियत से अपनी एक मुनफ़रद शनाख़्त बनाई है और अपनी एक मिशनरी भी चलाते हैं, अपने ससुराली ख़ानदान को रियासत का इक़तिदार दिलाने में अहम रोल अदा करने वाले हैं और उनकी कोशिशें हैं कि ईसाई तबक़ा यक कुतुबी तौर पर राय दही करे और एसा होता है तो यक़ीनन सयासी इमकानात तब्दील होसकते हैं।

एस एन जे ली मबलग़ ने जिनको ईसाईयत की इशाअत-ओ-तब्लीग़ के लिए करोड़ों रुपय वसूल होरहे हैं , ईसाईयों को यकजा करने अपने खज़ाने खोल दीए हैं। क्रिसमस को इस मर्तबा बहुत ही धूम धाम से मनाने का प्रोग्राम तरतीब दिया गया है और अभी से रियासत भर के सैंकड़ों गिरजाघरों में इस मख़सूस मिशनरी की तरफ़ से पकवानों का एहतिमाम किया जा रहा है और अंधों, बहरों, जिस्मानी माज़ोरेन, पसमांदा तबक़ात को ईसाईयत के करीब करने के बहाने उन्हें मुख़्तलिफ़ प्रोग्रामों में मदऊ किया जा रहा है और उनकी उम्दा पकवानों से ज़ियाफ़त की जा रही है।

बताया जाता है कि इस मिशनरी ने हलक़ावारी सतह पर ईसाईयों को यकजा करने और उनका सियासी ज़हन बनाने का एक मबसूत प्रोग्राम बनाया है। इन प्रोग्रामों के ज़रीये ईसाई तबके के साथ साथ समाज के कमज़ोर तबक़ात को करीब करने की कोशिश की जा रही है।

अब तक क्रिसमस तहवार के मौके पर छोटे छोटे गिरजाघरों में जो तक़ारीब हुआ करती थीं इनमें मदाओएन की ज़ियाफ़त का एहतिमाम नहीं किया जाता था बल्कि सिर्फ़ क्रिसमस के मौके पर केक काटा जाता था मगर क्रिसमस से बहुत पहले ही मुख़्तलिफ़ गिरजाघरों में कोई ना कोई प्रोग्राम मुनाक़िद होरहा है और इस प्रोग्राम के बाद शुरका की मयारी और आला पकवानों से ज़ियाफ़त की जा रही है।

बताया जाता है कि इन प्रोग्रामों के एहतेमाम के लिए मुख़्तलिफ़ ईसाई तनज़ीमों और अफ़राद को ख़तीर रक़ूमात फ़राहम की जा रही है ताकि इन प्रोग्रामों में शिरकत करने वालों को आने वाले इंतेख़ाबात में एक मख़सूस सयासी पार्टी के हक़ में इजतिमाई राय दही के लिए तय्यार किया जाये।

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