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अब एक और दलित सांसद नाराज, कहा- 4 साल में मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया

यूपी  में एक तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ भारत बंद के दौरान पुलिस द्वारा बिना भेदभाव के कार्रवाई की बात कह रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ यूपी में बीजेपी नेतृत्व के खिलाफ दलित सांसदों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है.

बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले से शुरू हुआ सिलसिला चौथे दलित सांसद की नाराजगी तक पहुंच चुका है. अब नगीना से बीजेपी सांसद यशवंत सिंह ने मोदी सरकार से नाराजगी जताई है.

यशवंत सिंह ने SC/ST एक्ट पर सुप्रीम के फैसले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. यशवंत सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे लेटर में दलितों के हितों की आवाज बुलंद की है.

लेटर में यशवंत सिंह ने लिखा कि वह जाटव समाज  के सांसद हैं. यशवंत सिंह ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी ओर से 4 साल में 30 करोड़ की आबादी वाले दलित समाज के लिए प्रत्यक्ष रूप से कुछ भी नहीं किया गया. बैकलॉग पूरा करना, प्रमोशन में आरक्षण बिल पास करना, प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण दिलाना आदि मांगें नहीं पूरी की गई.

यशवंत के अनुसार वे आरक्षण के कारण ही सांसद बन पाए. हालांकि उनकी योग्यता का उपयोग नहीं हो रहा है और उन्होंने बताया कि सांसद बनने के बाद उन्होंने पीएम मोदी से मांग की थी कि प्रमोशन में आरक्षण बिल पास कराया जाए. हालांकि यह मांग अबतक पूरी नहीं हुई है.

नाराजगी जाहिर करते हुए यशवंत ने कहा कि आज बीजेपी के दलित सांसद प्रताड़ना के शिकार बन रहे हैं. जनता को कई मुद्दों पर जवाब नहीं दे पा रहे हैं. इसके साथ ही यशवंत सिंह ने मांग की कि मोदी सरकार SC/ST एक्ट पर सुप्रीम के फैसले को कोशिश कर पलटवाये. साथ ही बैकलॉग पूरा करे, प्रमोशन में आरक्षण बिल पास हो और प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण मिले.

आपको बता दें कि यशवंत से पहले इटावा के बीजेपी सांसद ने अपनी ही सरकार से नाराजगी जताई थी. 2 अप्रैल के भारत बंद को लेकर दलितों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाने के मामले में अशोक दोहरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिकायत की है.

बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रवैये के खिलाफ दलित सांसद छोटेलाल खरवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपना दर्द बयान किया था. खरवार की चिट्ठी में यूपी प्रशासन द्वारा उनके घर पर जबरन कब्जा और उसे जंगल की मान्यता देने की शिकायत की गई है.

वहीं बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने अपनी ही सरकार के खिलाफ राजधानी लखनऊ स्थित कांशीराम स्मृति उपवन में ‘भारतीय संविधान और आरक्षण बचाओ महारैली का आयोजन’ किया. इस दौरान उन्होंने कहा था कि आरक्षण कोई भीख नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व का मामला है. अगर आरक्षण को खत्म करने का दुस्साहस किया गया तो भारत की धरती पर खून की नदियां बहेंगी.

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