Monday , September 24 2018

अब फार्मा कंपनियों को बड़े फॉन्ट में लिखना होगा जेनेरिक दवाओं का नाम

सस्ते दामों वाली जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने फार्मास्यूटिकल कंपनियों के लिए दवा के जेनेरिक नामों को लेबल पर दोगुना बड़े आकार के फॉन्ट में लिखना अनिवार्य कर दिया है. सरकार का ये नियम 13 सितंबर 2018 से लागू होगा.

सरकार के इस कदम से जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और डॉक्टरों और कंपनियों का गठजोड़ टूटेगा. इसके अलावा मरीजों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा. हालांकि, सरकार इस कदम में विटामिनों के कॉम्बिनेशन और फिक्स्ड डोज कॉमिबिनेशन वाली दवाओं को शामिल नहीं किया गया है. सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस तरह के विटामिन और फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन में ब्रांड नाम नीचे ब्रैकेट में या जेनेरिक नाम के बाद लिखा जाएगा.

अब तक भारत में ड्रग निर्माता, ब्रांड नाम को लेबल पर बोल्ड अक्षरों में लिखते हैं, जबकि जेनेरिक नामों को सामान्य फॉन्ट में लिखा जाता है. इससे पहले देश के सबसे बड़े चिकित्सा नियामक मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने डॉक्टरों से जेनेरिक नाम लिखने के लिए कहा था. मेडिकल काउंसिल के अनुसार, ड्रग के ब्रांड नाम को ब्रैकेट में लिखा जा सकता है. हालांकि, अब तक पूरी तरह से डॉक्टरों ने ऐसा करना शुरू नहीं किया है.

इंडियन फार्मास्यूटिकल एलायंस(आईपीए) के जनरल सेक्रेटरी डीजी शाह ने कहा कि बड़े दवा निर्माताओं के लॉबी समूह के मुताबिक, उनके सदस्यों ने जेनेरिक नामों को ब्रांड नाम से दो फॉन्ट बड़ा लिखने की प्रैक्टिस पहले से ही शुरू कर दी है. बता दें वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने पिछले साल के बजट भाषण के दौरान घोषणा की थी कि जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार नियम लाएगी.

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