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अब बिहार शिफ्ट होगा आईआईएम रांची!

रांची 21 जून : आईआईएम रांची को बिहार शिफ्ट करने की तैयारी शुरू हो गई है। आईआईएम इंतज़ाम इस सिलसिले में तजवीज तैयार कर रहा है। जल्दी ही बिहार के वजीर ए आला नीतीश कुमार के साथ रस्मी बैठक होगी, जिसमें फैसला लिया जाएगा। रांची में इसके लिए

रांची 21 जून : आईआईएम रांची को बिहार शिफ्ट करने की तैयारी शुरू हो गई है। आईआईएम इंतज़ाम इस सिलसिले में तजवीज तैयार कर रहा है। जल्दी ही बिहार के वजीर ए आला नीतीश कुमार के साथ रस्मी बैठक होगी, जिसमें फैसला लिया जाएगा। रांची में इसके लिए 700 करोड़ रुपए की लागत से नया कैंपस बनाने की मंसूबा थी। मगर, तीन साल बाद भी जमीन न मिलने की वजह से इंतेजामिया ने यह फैसला लिया है। आईआईएम के डायरेक्टर प्रो. एमजे जेवियर ने कहा कि बिहार में इसका हेड क्वार्टर होगा, जबकि रांची में यह रीजनल सेंटर के तौर में काम करेगा।

गाँव के मुखालिफत की वजह नहीं मिली जमीन

रियासत हुकूमत ने सबसे पहले नगड़ी में 76.77 एकड़ जमीन फराहम कराई थी। आदरे ने 1.75 करोड़ रुपए की लागत से उस जमीन पर बाउंड्री वॉल भी बनवाया। मगर, गाँववालों के मुखालिफत की वजह यह जमीन नहीं मिल सकी। इसके बाद नामकुम के राजाउलातू में जमीन की निशान देहि की गई। इंसानी वसायल तरक्की वजारत की टीम ने जमीन का जायजा लिया और मंजूरी दे दी। लेकिन, यह जमीन भी नहीं मिल पाई। अब आदरे को जमीन फराहम कराने की फाइल चीफ सेक्रेटरी के पास पड़ी हुई है।

किराए के कमरे में चल रहा अदारा

आईआईएम रांची साल 2010 से “सूचना भवन” में किराए के कमरे में चल रहा है। इसके लिए सूचना भवन के ग्राउंड फ्लोर, थर्ड फ्लोर और फिफ्थ फ्लोर पर कमरे मिले हैं। पांच कमरों में क्लासरूम चलता है, जबकि बाक़ी में डायरेक्टर चैंबर, लाइब्रेरी, कॉन्फ्रेंस हॉल, फैकल्टी चैंबर और एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिस है।

हॉस्टल भी किराए पर

मुस्तकिल कैंपस न होने की वज़ह अदारा का हॉस्टल भी किराए पर लिया गया है। यह अदारे से आठ किलोमीटर दूर होटवार में है। ऐसे में तालिब इल्म को आने-जाने में काफी परेशानी होती है।

मर्क़जी वजीर की हिदायत पर भी अमल नहीं

मर्क़जी देहि तरक्की वजीर जयराम रमेश ने 5 जून को गवर्नर के सलाहकार मधुकर गुप्ता और चीफ सेक्रेटरी आरएस शर्मा को सुकरहुटू में अदारे को जमीन फराहम कराने को कहा था, मगर ऐसा नहीं हुआ। वहीं बिहार के वजीर ए आला नीतीश कुमार ने कहा था कि आईआईएम बिहार शिफ्ट करें, हुकूमत उन्हें पूरी जमीन फराहम कराएगी।

बिहार से चल रही बात

“साल 2010 से अब तक दो बैच निकल चुके हैं। इसके बावजूद अदारे को मुस्तकिल कैंपस के लिए जमीन नहीं मिल पाई है। ऐसे में अदारा ठीक से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इन्हीं वजूहात से इसे बिहार शिफ्ट कराने की बात चल रही है।”

प्रो. एमजे जेवियर, निदेशक, आईआईएम रांची

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