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अमरीका, इराक़ से सिफ़ारती तआवुन करने तैयार

वज़ीरे आज़म इराक़ नूर अलमालिकी के पास अब सिवाए इस के कोई और मुतबादिल नहीं है कि वो मुख़्तलिफ़ इलाक़ों के जंगजूओं के क़ब्ज़ा में आ जाने के बाद मिली जुली हुकूमत तशकील दें या फिर अपने ओहदा से दस्तबरदार हो जाएं क्यूंकि आला सतही शीआ उल्माए दी

वज़ीरे आज़म इराक़ नूर अलमालिकी के पास अब सिवाए इस के कोई और मुतबादिल नहीं है कि वो मुख़्तलिफ़ इलाक़ों के जंगजूओं के क़ब्ज़ा में आ जाने के बाद मिली जुली हुकूमत तशकील दें या फिर अपने ओहदा से दस्तबरदार हो जाएं क्यूंकि आला सतही शीआ उल्माए दीन और वाइट हाउस का ये कहना है कि इराक़ के मौजूदा बोहरान के लिए नूर अलमालिकी भी जुज़वी तौर पर ज़िम्मेदार हैं।

इराक़ में अब ये मज़ालबा ज़ोर पकड़ता जा रहा है नूर अलमालिकी को कुर्द और सुन्नी अक़लीयतों तक रसाई हासिल करना चाहीए क्यूंकि सिर्फ़ एक रोज़ क़ब्ल ही सदर अमरीका बराक ओबामा ने उन्हें चैलेंज किया था कि शीआ और सुन्नी मसलक से बालातर होकर उन्हें तमाम इराक़ियों के लिए क़ियादत की नुमाइंदगी करना चाहीए।

आयतुल्लाह अली अल सिस्तानी ने भी मुल्क के मौजूदा बोहरान के लिए नूर अलमालिकी को ही मौरिदे इल्ज़ाम ठहराया है।

याद रहे कि इराक़ से अमरीकी अफ़्वाज के 2011 में तख़लिया के बाद मौजूदा बोहरान को सब से ज़्यादा संगीन तसव्वुर किया जा रहा है। दूसरी तरफ़ अमरीका इस बात के लिए कोशां है कि इराक़ में मसलकी बुनियाद पर मुनक़सिम क़ियादत को मुत्तहिद किया जाये।

जंगजूओं की शोर्श की वजह से नूर अलमालिकी को ना सिर्फ़ दाख़िली तौर पर बल्कि आलमी सतह पर भी सख़्त मुख़ालिफ़त का सामना है। ओबामा ने जुमेरात को ही एलान कर दिया था कि वो 300 ओहदेदारों पर मुश्तमिल एक मुशावरती मिशन इराक़ रवाना कर रहे हैं।

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