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अमरीका के किसी भी वादे पर यकीन नहीं : ईरानी लीडर

ईरान : इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अपने संबोधन में विदेश पॉलिसी के बारे में कहा कि मौजूदा हुकूमत की एक तरजीह विदेश नीति रही है और एशिया, अफ़्रीक़ा तथा लेटिन अमरीका को, ईरान की विदेश पॉलिसी में मुनासिब हिस्सेदारी मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि परमाणु समझौते के मामले में अमरीका के उल्लंघनों से अनुभव हासिल करना चाहिए और यह अनुभव हमें सिखाता है कि अमरीका की किसी भी सरकार के वादे पर भरोसा नहीं किया जा सकता और उनके वादों के मुक़ाबले में कोई नक़द सौदा नहीं करना चाहिए। आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि जेसीपीओए के उल्लंघन के संबंध में मेरी आलोचना का पात्र हमारे वार्ताकार नहीं बल्कि दूसरा पक्ष है क्योंकि हमारे वार्ताकारों ने अपनी क्षमता भर दिन-रात प्रयास किया जिसके लिए वे सराहना के पात्र हैं।

वरिष्ठ नेता ने ग्यारहवीं सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए, सरकार सप्ताह को सरकार द्वारा किए गए काम की रिपोर्ट को जनता के सामने पेश करने के लिए उचित अवसर बताया। उन्होंने कहा कि देश की व्यापकता, नाना प्रकार की समस्याओं और ज़्यादा अपेक्षाओं के मद्देनज़र, देश का संचालन एक कठिन काम है। वरिष्ठ नेता ने बुधवार को हुयी इस मुलाक़ात में सरकार सप्ताह की बधाई देते हुए कहा कि मरहूम राष्ट्रपति शहीद मोहम्मद अली रजाई और प्रधान मंत्री शहीम जवाद बाहुनर की याद निष्ठा, मेहनत और आवाम के निकट होने की प्रतीक है।

उन्होंने राष्ट्रपति और मंत्रीमंडल के कुछ सदस्यों की रिपोर्ट की तरफ इशारा करते हुए कि जिनमें सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का उल्लेख है, कहा कि इन सार्थक रिपोर्टों से अवाम को इत्तिला किया जाए क्योंकि अवाम, उसका यकीन और उसकी आशा ही अहम जायदाद है। आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने ग्यारहवीं सरकार के 3 साल तेज़ी से गुज़रने की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सरकार को चाहिए कि प्रोग्राम बनाकर बाक़ी बचे हुए एक साल में पूरी तन्मयता से काम करे।

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