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अमरीका मसाइल के दलदल में फंस चुका है : इमामे ख़ामिनाई

तेहरान। 16 अक्तूबर (एजैंसीज़) ईरानी मुसल्लह अफ़्वाज के कमांडर इनचीफ़ आयत-उल्लाह इमामे ख़ामिना ई ने फ़ौज के एक ग्रुप से मुलाक़ात करते हुए इराक़ के साथ मरहूम सद्दाम हुसैन के ज़माने में आठ तवील सालों तक चलने वाली जंग को इस्लामी जमहूरीया ईरा

तेहरान। 16 अक्तूबर (एजैंसीज़) ईरानी मुसल्लह अफ़्वाज के कमांडर इनचीफ़ आयत-उल्लाह इमामे ख़ामिना ई ने फ़ौज के एक ग्रुप से मुलाक़ात करते हुए इराक़ के साथ मरहूम सद्दाम हुसैन के ज़माने में आठ तवील सालों तक चलने वाली जंग को इस्लामी जमहूरीया ईरान के लिए इंतिहाई महंगी क़रार दिया। उन्हों ने कहा कि इस जंग में ईरान का पल्ला भारी था लेकिन इस की भारी क़ीमत भी चुकानी पड़ी। आज इस्लामी जमहूरीया ईरान का दबदबा सारे आलम में देखा जा सकता है। यही नहीं बल्कि जितने भी इलाक़ाई इस्लामी और ग़ैर इस्लामी ममालिक हैं, वो ईरान के तईं एहतिराम का जज़बा रखते हैं। उन्हों ने कहा कि बदबख़ती की बात ये है कि मग़रिबी ममालिक ने ईरान का जो हुआ सारे आलम में खड़ा कर दिया है, आज वही ख़ौफ़ हमारे लिए मुसबत साबित होरहा है क्योंकि मग़रिब उस वक़्त उलझन का शिकार है जिन में सब से पहले अमरीका का नाम लेना बेहतर होगा जिस की ग़लत पालिसीयों और कारकर्दगियों ने उसे मआशी, सयासी और सक़ाफ़्ती तौर पर मसाइल में उलझा दिया है जिस से निकलना अमरीका के लिए मुश्किल होरहा है। अमरीका को ये याद रखना चाहीए कि जारहीयत और माद्दियत पसंदी अमरीका के किसी काम आने वाली नहीं है।

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