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अमरीकी ताक़त के ज़वाल में अलक़ायदा का नुमायां किरदार

जर्मनी के ज़राए इबलाग़ का कहना है कि 12 सितंबर 2001 को अमरीकी सरज़मीन पर दहश्तगर्दाना हमलों के बाद अलक़ायदा अपनी इस हिक्मते अमली में काफ़ी कामयाब रही है जिस का मक़सद आलमी सतह पर अमरीका के ज़वाल के अमल को तेज़ करना था।

जर्मनी के ज़राए इबलाग़ का कहना है कि 12 सितंबर 2001 को अमरीकी सरज़मीन पर दहश्तगर्दाना हमलों के बाद अलक़ायदा अपनी इस हिक्मते अमली में काफ़ी कामयाब रही है जिस का मक़सद आलमी सतह पर अमरीका के ज़वाल के अमल को तेज़ करना था।

जर्मन ख़बररसां इदारे के मुताबिक़ ख़ारिजा पॉलिसी के अमल में शामिल फ़िक्री अशराफ़िया में इस बात पर इत्तिफ़ाक़ पाया जाता है कि साबिक़ सदर जॉर्ज बुश की इंतेज़ामीया ने 12 सितंबर के दहश्तगर्दाना हमलों पर ज़रूरत से ज़्यादा रद्दे अमल ज़ाहिर किया और ये सिलसिला आज तक जारी है।

उस की एक अहम जो उस वक़्त की अमरीकी इंतेज़ामीया में हामीयों के तौर पर नए क़दामत पसंदों का असरो रसूख़ था जिन में नायब सदर डिक चेनी, पेन्टगान के सरब्राह डोनल्ड रेम्ज़फ़ील्ड और उन के बेशतर साथी शामिल थे।

ईराक़ पर हमला करने से अमरीका बिन लादैन के फेंके हुए इस जाल में फंस गया जिस का मक़सद उसे जंगों में उलझा कर उस की ताक़त कमज़ोर करना था। इस बात में कोई शुबा नहीं कि ईराक़ पर हमला से अमरीका की ताक़त कमज़ोर हुई।

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