अमरीकी सुप्रीमकोर्ट का फ़ैसला ‘ख़ुदा की रज़ा’ से बड़ा नहीं

अमरीकी सुप्रीमकोर्ट का फ़ैसला ‘ख़ुदा की रज़ा’ से बड़ा नहीं
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अमरीकी रियासत केंटकी की एक ख़ातून अहलकार को इसलिए जेल भिजवा दिया गया है कि उसने हमजिंस परस्त अफ़राद को शादी की अस्नाद जारी करने से इनकार कर दिया था।

उस का कहना था कि अमरीकी सुप्रीमकोर्ट का हुक्म ‘ख़ुदा की रज़ा’ से बड़ा नहीं है। रियासत केंटकी के शहर आईश लैंड से जुमेरात तीन सितंबर को मिलने वाली न्यूज़ एजेंसी रोइटर्स की रिपोर्टों के मुताबिक़ अमरीकी सुप्रीमकोर्ट इसी साल जून में पूरे अमरीका पर लागू होने वाला ये फ़ैसला दे चुकी है कि हमजिंस परस्त अफ़राद भी आपस में बाक़ायदा क़ानूनी शादियां कर सकते हैं और ऐसी सिविल शादीयों के बाद हमजिंस परस्त जोड़ों को आपस में शादीशुदा होने के क़ानूनी सर्टीफ़िकेट जारी किए जा सकते हैं।

रोइटर्स के मुताबिक़ इस पसमंज़र में केंटकी की काउंटी रोवन Rowan की एक ख़ातून क्लर्क ने, जो पुख़्ता मसीही अक़ीदे की हामिल है, अपने दफ़्तर में आने वाले शादीशुदा हमजिंस परस्त अफ़राद को शादी की अस्नाद जारी करने से इनकार कर दिया था।

इस ख़ातून अहलकार का, जिसका नाम किम डेविस बताया गया है, कहना था कि हमजिंस परस्त मर्दों या औरतों को एक दूसरे के साथ शादीशुदा होने के सर्टीफ़िकेट जारी करना उस के नज़दीक मज़हबी हवाले से ग़लत होगा। किम डेविस ने अपने इस फ़ैसले की वजह अपने मज़हबी अक़ाइद को बनाया था।

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