Friday , December 15 2017

अमीत शाह ,बी जे पी के लिए बेहतर,क़ौम के लिए ख़तरनाक

वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के क़रीबी साथी अमीत शाह को सदर बी जे पी बनाए जाने के बाद क़ौमी सतह पर सेकूलर या अमन पसंद हिंदुओं में ये बहस ज़ोर पकड़ रही है कि अमीत शाह गुजरात मॉडल का मुल्क भर में तजुर्बा करने की कोशिश करेंगे।

वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के क़रीबी साथी अमीत शाह को सदर बी जे पी बनाए जाने के बाद क़ौमी सतह पर सेकूलर या अमन पसंद हिंदुओं में ये बहस ज़ोर पकड़ रही है कि अमीत शाह गुजरात मॉडल का मुल्क भर में तजुर्बा करने की कोशिश करेंगे।

बी जे पी के माज़ी को देखें तो अमीत शाह पार्टी के लीडर की हैसियत से मुनासिब नहीं। हिन्दुओं को तशद्दुद के लिए उकसाने की उन की आदत ख़तरनाक है। रिवायती तौर पर हिंदू अदम तशद्द के परस्तार होते हैं मगर बी जे पी ने तशद्दुद का रास्ता इख़तियार करके हिंदू तबक़ा को ज़हनी तौर पर तशद्दुद के लिए तैयार करने की पालिसी पर अमल करना शुरू किया है।

अमीत शाह को पार्टी का सदर बनाने का मक़सद क़ौम को ख़तरात की आग में झोंकना है। इस लिए अमीत शाह पर पार्टी के लिए बेहतर और क़ौम के लिए ख़तरनाक हैं यूवक क्रांति दल के बानी कुमार सीता ऋषि ने ये बात बताई। कांग्रेस पार्टी के एक वर्कर ववीक घाटे ने कहा कि बी जे पी के क़ौल और फे़ल में काफ़ी फ़र्क़ पाया जाता है और हम ने बी जे पी के इक़तिदार पर आने के बाद ये देख लिया है।

अमीत शाह गुजरात में दाख़िल होने पर पाबंदी लगाने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी बी जे पी ने उन्हें अपना लीडर मुंतख़ब किया है तो क्या यही तरक़्कियाती मॉडल है जिस पर बी जे पी अमल करना चाहती है। इस तरह के इक़दाम से पार्टी ये मिसाल क़ायम करना चाहती है कि अगर आप मुजरिम हैं तो इस तरह के ओहदा के लिए अहल हैं। अगर नरेंद्र मोदी इस तर्ज़ की हुकूमत चलाऐंगे तो वो आइन्दा इंतिख़ाबात में इक़तिदार पर नहीं आऐंगे।

ववीक गीते ने कहा कि बी जे पी के लिए अमीत शाह मौज़ूं नहीं हैं। राजनाथ सिंह एक अच्छे लीडर हैं उन्होंने अपने उसूलों को कभी तर्क नहीं किया और वो करप्ट भी नहीं हैं। बी जे पी के अमीत शाह को सदर बनाकर एक मुजरिम को भारी ज़िम्मेदारी दी है इस का मतलब क़ौमी पार्टी को एक मुजरिम प्यारी है इस का मुजरिमाना रिकार्ड इसके लिए कोई मानी नहीं रखता तो फिर बहुत ख़राब तबदीली है।

बी जे पी ने आर एस एस के साथ अपने ताल्लुक़ात को मज़बूत बनाने के लिए ये सब कुछ किया है। अमीत शाह और नरेंद्र मोदी की शराकतदारी का मक़सद नए सरमाया कारों को अपने जाल में फांसना है। पोलीटिकल साइंस के प्रोफेसर और सियासी तजज़िया निगार प्रकाश पवार ने ये बात बताई कि अमीत शाह को इंकाउंटर्स का माहिर क़रार दिया जाता है और बी जे पी की क़ियादत भी उनकी इस इंकाउंटरस की सलाहियतों को पसंद करती है।

अमीत शाह इंतिख़ाबी मुहिम चलाने में कामयाब हुए हैं लेकिन बी जे पी क़ियादत के लिए उन की सलाहियत पर शुबा है। इस का मतलब ये है कि आर एस एस बी जे पी ने पार्टी और हुकूमत के तमाम उमूर मोदी के हाथों सौंप दी हैं। सीनियर सोशलिस्ट लीडर भाटी वर्मा ने ये बात बताई और कहा कि अमीत शाह तो सिर्फ़ एक साया है असल में मोदी ही हर चीज़ पर कंट्रोल रखते हैं ,वो अमीत शाह को इस्तिमाल करते हुए अपने मंसूबे रूबल अमल लाएंगेगे।

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