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अमीरों के छोड़े हुए खाने से 70 हज़ार ग़रीबों का गुज़ारा

दुबई के बड़े होटलों, सूपर मार्किट और अमीरों के घरों में सजने वाले दस्तरख़्वानों पर छोड़ दिया गया खाना 70 हज़ार ग़रीबों का पेट भर रहा है।

दुबई के बड़े होटलों, सूपर मार्किट और अमीरों के घरों में सजने वाले दस्तरख़्वानों पर छोड़ दिया गया खाना 70 हज़ार ग़रीबों का पेट भर रहा है।

दुबई के एक ख़ैराती इदारा और दुबई म्यूंसिपल्टी की जानिब से मुशतर्का इक़दाम करते हुए बड़े घरानों, होटलों और दीगर तक़ारीब में बच जाने वाले खाने को इकट्ठा करके उन्हें ज़रूरतमंदों में तक़सीम किया जाता है। दुबई की एन जी ओ रवीती शामी सोसाइटी जिसने छोड़े हुए खाने को इकट्ठा करने और तक़सीम करने का ज़िम्मा लिया है, 2012 से दुबई म्यूंसिपल्टी की निगरानी में 70 हज़ार ग़रीबों में ये खाना तक़सीम किया जा रहा है।

ज़राए ने कहा कि इस खाने में लज़ीज़ अशिया शामिल होती हैं, जिनमें ख़ासकर कबाब, अरबी गोश्त और चावल से बनाई गई बिरयानी और चीज़ पेस्ट्री, ब्रेड पुडिंग वग़ैरा शामिल होती हैं। ग़रीबों के लिए इस तरह का खाना दस्तरस से बाहर है लेकिन ख़ैराती इदारे ने अमीरों के छोड़े हुए खानों को इकट्ठा करके भूखे ग़रीबों के शिकम(पेट) को सैर करने का बीड़ा उठाया है। इस साल से ये छोड़े हुए खाने को इकट्ठा करने की तादाद बढ़ जाएगी। दुबई में एक सर्वे में बताया गया है कि 30 ता 40 फ़ीसद खाना ज़ाए किया जाता है। मुख़्तलिफ़ बड़ी तक़ारीब में अमीर हज़रात दस्तरख़्वान पर बेहिसाब खाना छोड़ देते हैं।

इस तरह गुज़िशता हफ़्ता एक इफ़तार पार्टी में 1200 मेहमानों के लिए इंतिज़ाम किया गया था लेकिन सिर्फ़ 500 मेहमान ही तनावुल करसके बाक़ी का खाना ज़ाए होगया। इस खाने को ग़रीबों तक पहुंचाने का काम एनजीओज़ ने किया है।

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