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अमेरिका की मदद से दाऊद-हाफिज को दबोच सकता है भारत

पाकिस्तान को दाऊद और हाफिज सईद जैसे आतंकवादी सरगनाओं के दबोचे जाने का खतरा सताने लगा है। पाकिस्तानी एजेंसियों ने भारत के इरादों का हवाला देकर अपने सुरक्षा तंत्र को आगाह किया है। पाकिस्तानी एजेंसियों ने इन दोनों आतंकवादियों की सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ाई है।

भारत की खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक, भारत की अमेरिका के साथ आतंकवादी निगरानी केंद्र में भागीदारी से पाकिस्तान बौखला गया है। पाकिस्तानी एजेंसियां इस बात से परेशान हैं कि नई साझेदारी से उनकी भारत में आतंक परोसने की नीतियों पर लगाम कसी जा सकती है। खासतौर पर दाऊद और हाफिज जैसे आतंकियों पर शिकंजा कसा जा सकता है।

जराए ने कहा कि पाकिस्तान मान रहा है कि अमेरिका परस्पर संबंधों को मजबूत बनाने के लिए दाऊद और हाफिज को पकड़वाने में भारत की मदद कर सकता है। आशंका जाहिर की गई है कि भारतीय एजेंसियां इन आतंकी सरगनाओं को किसी अन्य देश में जाने पर पकड़ने की रणनीति बना रही हैं। इसके चलते इन दोनों को ऐसे देशों में न जाने की सलाह दी गई है, जिनका भारत से किसी तरह का समझौता है। दाऊद संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में फैली अपनी संपत्तियों और कारोबार के लिए समय समय पर दौरा करता है।

भारत अमेरिका के साथ टेररिस्ट स्क्रीनिंग सेंटर में भागीदार बना है। इसके तहत अमेरिकी एजेंसी भारत को आतंकवादियों की एक देश से दूसरे देश या स्थान पर आवाजाही के बारे में सटीक जानकारी (रियल टाइम डाटा) मुहैया कराएगी।

भारत ने कई देशों के साथ आतंकरोधी साझेदारी बढ़ाई है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के अलावा भारत का आतंक विरोधी नेटवर्क खाड़ी देशों के साथ भी मजबूत हुआ है। ऐसे में भारत की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। भारत लगातार पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने कहा, दाऊद व हाफिज जैसे दुश्मनों को गिरफ्त में लेना भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है। भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर दाऊद और हाफिज जैसे आतंकी सरगना लंबे समय से हैं। लेकिन अब भारत ने इनके खिलाफ अभियान में खुलकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की पैरोकारी की है।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं कि दाऊद, हाफिज सहित कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी पाकिस्तान में हैं। इन पर कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि इसी रणनीति के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवादी सूचनाओं के आदान प्रदान को लेकर भारत और अमेरिका में समझौता हुआ।

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