अमेरिका के बाद अब ऑस्ट्रेलिया ने भी बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी स्वीकारा

अमेरिका के बाद अब ऑस्ट्रेलिया ने भी बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी स्वीकारा
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अमेरिका के बाद अब ऑस्ट्रेलिया ने भी बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में स्वीकार करने का संकेत दिया है।

ब्रिटिश समाचार पत्र ‘द गार्डियन’  की रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि ‘वह अमेरिकी निर्णय का पालन करने के लिए स्वतंत्र हैं और अमेरिकी फ़ैसला एक सूझबूझ वाला निर्णय है’। एक पत्रकार के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी स्वीकार करने के निर्णय में उनकी धार्मिक मान्यताएं शामिल नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री का संबंध प्रोटेस्टेंट ईसाई धर्म से है।

आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि वह इस बात का भी प्रयास कर रहे हैं कि ज़ायोनी शासन और फ़लिस्तीन के बीच मौजूद विवादों को हल करा सकें। उन्होंने कहा कि अभी तक हमें इस काम में कोई विशेष उपलब्धि प्राप्त नहीं हो सकी है और यही कारण है कि आज भी फ़िलिस्तीन और इस्राईल का संकट अपनी जगह वैसे ही बना हुआ है। मॉरिसन ने कहा कि जिस तरह की स्थिति है उसको उसी पर बाक़ी नहीं रखा जा सकता और उसके समाधान के लिए हम सबको रास्ते खोजनें पड़ेंगे।

इस बीच ऑस्ट्रेलिया के पड़ोसी और दोस्त देश इंडोनेशिया ने ऑस्ट्रेलिया द्वारा बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी स्वीकार करने के फ़ैसले पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन को चेतावनी दी है। जकार्ता का कहना है कि फ़िलीस्तीन के मुद्दे पर नए कूटनीतिक निर्णय से दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते प्रभावित हो सकते हैं।

ग़ौरतलब है कि अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने पूरी दुनिया के विरोध के बावजूद 6 दिसंबर 2017 को बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता देते हुए अमरीकी दूतावास को तेल अविव से बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित कर दिया था। ट्रम्प के इस निर्णय का न सिर्फ़ अरब देशों बल्कि योरोप सहित दुनिया भर के देशों ने कड़ा विरोध किया था।

ट्रम्प के इस एलान के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव भी पारित हुआ था जिसमें बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता न देने का फ़ैसला किया गया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 128 और विरोध में मात्र 9 मत पड़े थे जबकि 35 देशों ने इसमें भाग नहीं लिया था।

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