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अमेरिका ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए आधे से भी अधिक हिस्से की कटौती की

UNRWA पाँच लाख से अधिक फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए जीवन रेखा रहा है

वाशिंगटन : अमेरिकी सरकार फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी को अपने नियोजित निधि के आधे से भी अधिक हिस्से को कटौती कर रही है, यह एक ऐसा कदम है, जो लाखों लोगों की जरूरत के लिए भयावह साबित हो सकता है। राज्य विभाग ने मंगलवार को घोषणा की कि वह फिलीस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और वर्क्स एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के लिए $125 मिलियन सहायता पैकेज में से $ 65 मिलियन को रोक रहा है। एक पत्र में, विभाग ने कहा कि अतिरिक्त अमेरिकी दान संयुक्त राष्ट्र राहत और वर्क्स एजेंसी के बड़े बदलावों पर होगा। वे धन “भविष्य के विचार के लिए फ्रीज़ हैं”

लगभग 70 वर्षों से यूएनआरडब्ल्यूए लेबनान, जॉर्डन और सीरिया में पांच लाख से अधिक पंजीकृत फिलीस्तीन शरणार्थियों के लिए जीवन रेखा रहा है। पीएलओ सेंट्रल काउंसिल ने इजरायल की स्वीकृति को निलंबित करने की सिफारिश की है, यह खाद्य आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सेवाओं और रोजगार में सहायता प्रदान करता है।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से रिपोर्ट करते हुए अल जजीरा के जेम्स बे ने अमेरिका के इस कदम के बारे में कहा, यह यूएनआरडब्ल्यूए का सबसे बड़ा दाता है जिसका बजट लगभग 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा “यूएनआरडब्ल्यूए ऐसी एजेंसी है जो इतने हताश लोगों की जरूरतों को पूरा करता है,” यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 3 जनवरी को फिलीस्तीनियों को सहायता में कटौती करने की धमकी दी थी।

ट्वीट्स में, ट्रम्प ने कहा था “… हम फ़िलिस्तीनियों को एक साल में लाखों डॉलर का भुगतान करते हैं और हमें कोई प्रशंसा या सम्मान नहीं मिलता है। “… फिलिस्तीनियों के साथ अब शांति से बात करने को हम तैयार नहीं हैं, हमें इन भविष्यगत के भुगतानों में किसी को क्यों भुगतान करना चाहिए?”

ये यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में पहचानने के अपने विवादास्पद फैसले के एक महीने से भी कम समय के बाद आया, यह एक ऐसा कदम था जिससे व्यापक अंतर्राष्ट्रीय निंदा हुयी। फिलीस्तीनी नेताओं ने कहा कि था की अमेरिका द्वारा आगे रखी किसी भी शांति योजना को स्वीकार नहीं करेंगे।

सहायता को काटने के बारे में अमेरिकी धमकियों के बाद, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने UNRWA को बुलाया और “फर्जी शरणार्थियों” की सहायता करने के लिए एजेंसी पर आरोप लगाया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो जीटरस ने मंगलवार को कहा कि उन्हें वॉशिंगटन के निर्णय के बारे में सूचित नहीं किया गया था। “सबसे पहले, UNRWA एक फिलीस्तीनी संस्था नहीं है, यूएनआरडब्ल्यूए एक संयुक्त राष्ट्र संस्था है,” जीटरस ने इस बारे में अपनी गहरी “चिंता” व्यक्त करते हुएकहा।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा अगर एजेंसी “महत्वपूर्ण सेवाएं” और आपातकालीन सहायता प्रदान करने की स्थिति में नहीं है तो वह “बहुत गंभीर समस्या” पैदा करेगा।

फिलिस्तीन लिबरेशन संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य हानान अशरफी ने कहा कि इजरायल सरकार ने “इजरायली सरकार के निर्देशों का पालन करने के लिए” धीरे-धीरे एक एजेंसी को नष्ट करने का निर्देश लगाया है जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्थापित किया गया था ताकि वह फिलीस्तीनी शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा कर सके और उन्हें आवश्यक सेवाएं प्रदान कर सके ।

उसने एक बयान में कहा था कि ट्रम्प प्रशासन “फिलिस्तीनी लोगों के सबसे कमजोर वर्ग को टार्गेट कर रही है और शरणार्थियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, आश्रय और सम्मानित जीवन के अधिकार को निशाना बना रही है”, उन्होने चेतावनी देते हुए कहा की अमेरिका “ऐसी परिस्थितियों का निर्माण कर रही है जिससे आगे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगा”

दहेश शिविर में 18 वर्षीय फिलिस्तीनी शरणार्थी यजन मुहम्मद सबरी ने पिछले सप्ताह अल जजीराह को बताया था की “अगर यूएनआरडब्ल्यूए दूर चली जाती है, तो कोई शिक्षा नहीं होगी, कोई स्वास्थ्य सेवा नहीं, कोई स्वच्छता नहीं होगी।” “कुछ भी नहीं होगा – सब कुछ गायब हो जाएगा।”

एआदा शिविर में रह रहे 44 वर्षीय शरणार्थी सलाहा अजर्म ने कहा था कि “यदि सेवाएं बंद हो जाएंगी, तो एक क्रांति होगी”। “जॉर्डन और सीरिया में शरणार्थी शिविरों में फिलीस्तीनी विद्रोह शुरू हुआ और यह फिर से होगा।” नॉर्वे की रिफ्यूजी काउंसिल के महासचिव एगलैंड ने भी अपने फैसले को रिवर्स करने के लिए अमेरिकी सरकार से आग्रह किया था।

उन्होंने एक बयान में कहा, “इस कदम से मध्य पूर्व में कमजोर फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे, जिनमें वेस्ट बैंक में सैकड़ों शरणार्थी बच्चों और गाजा, लेबनान, जॉर्डन और सीरिया शामिल हैं, जो उनकी शिक्षा के लिए एजेंसी पर निर्भर हैं।”

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