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अमेरिका-रूस-चीन की स्पेस वार से जुड़ी तैयारियों पर एक रिपोर्ट

जमीनी लड़ाई में तो किसी भी परमाणु संपन्न देश से पार पाना आज मुश्किल है। इसीलिए दुनिया की महाशक्तियां स्पेस वार (अंतरिक्ष में जंग) लड़ने की तैयारी में जुट गई है। उन्हें मालूम है कि आजकल किसी भी देश का पत्ता तक भी सेटेलाइट से खड़कता है। ऐसे में अगर उस देश के सेटेलाइट को ही काबू या नेस्तनाबूद कर दिया जाए तो उसे शरणागत होना ही पड़ेगा। सीरिया हमले के बहाने विभिन्न देशों की स्पेस वार से जुड़ी तैयारियों पर पेश है एक रिपोर्ट:

छह मार्च, 2018 को अमेरिकी डिफेंस इंटेलीजेंस एजेंसी के निदेशक लेफ्टीनेंट जनरल रॉबर्ट पी एश्ले जूनियर ने अमेरिकी सीनेट आम्र्ड सर्विसेज कमेटी के सामने बयान दिया कि रूस और चीन ऐसे हथियार विकसित कर रहे हैं जिसका इस्तेमाल वे स्पेस वार में कर सकते हैं। यह बात और है कि अमेरिका खुद इस कदम को बहुत पहले उठा चुका है।

1970 में कैलिफोर्निया की लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लैबोरेटरी ने एक्सकैलीबर परियोजना पर काम किया। इसका मकसद सीधे अंतरिक्ष में परमाणु विस्फोट करना था। लेजर और एक्स रेज से कई मिसाइलों को एक साथ खत्म करने की तकनीक को और व्यापक बनाते हुए सेटेलाइट तक को निशाना बनाया जा सकता है।

अंतरिक्ष में जंग का यह पहला कदम हो सकता है। 2007 और 2008 में सेटेलाइट हैकिंग के कई मामले सामने आए, लेकिन उनमें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन अगर नुकसान करने की मंशा हो तो फायर थ्रस्टर्स को चालू करके सेटेलाइट को कक्षा में घूमने पर विवश किया जा सकता है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी क्वांटम इनक्रिप्शन तकनीक पर काम कर रही है जो उसके सेटेलाइटों को हैक होने से बचाएगा।

सेटेलाइट नाशक मिसाइलें

अमेरिका, रूस और चीन अपनी ऐसी क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं। जिसके तहत अंतरिक्ष में मौजूद किसी सेटेलाइट को धरती से मिसाइल दागकर तबाह किया गया। अमेरिका ने तो किसी यान को मार गिराने की रिसर्च तभी शुरू कर दी थी जब रूसियों ने 1957 में अपना पहला सेटेलाइट स्पुतनिक 1 अंतरिक्ष में भेजा था। रूस भी कहां पीछे रहने वाला था।

1960 में उसने इस्त्रेबिटेल स्पुतनिक (लड़ाकू उपग्रह) का परीक्षण किया। इसे इस तरह डिजायन किया गया था जिससे यह दूसरे उपग्रह के पास जाकर खुद को विस्फोट से उड़ाकर उसे भी तबाह कर देता। 2015 में इस देश ने एंटी सेटेलाइट मिसाइल का परीक्षण किया। 2007 में चीन ने ऐसा ही परीक्षण किया। अमेरिका ने अपने विफल हो धरती की ओर गिर रहे जासूसी उपग्रह को मिसाइल से निशाना बनाया।

सेटेलाइटों से ही हमला

अंतरिक्ष विशेषज्ञ इस संभावना को भी खारिज नहीं करते हैं जब एक सेटेलाइट केवल इस मंशा के साथ अंतरिक्ष में भेजा जाए कि वहां जाकर वो लक्षित सेटेलाइट को नुकसान पहुंचा सके। हालांकि इससे हमलावर सेटेलाइट को भी नुकसान पहुंच सकता है। लिहाजा उसे आधुनिक तरीकों से ज्यादा सुसज्जित करना पड़ेगा। एक तरीके से यह अंतरिक्ष में रोबोट की लड़ाई सरीखा दृश्य होगा। यह कोरी कल्पना नहीं है। इस तरह के अभियान कई देशों में अति गोपनीय रूप में परवान चढ़ रहे हैं।

अगर हैम चीन की बात करें तो अंतरिक्ष में उपग्रह को मार गिराने का तजुर्बा चीन के पास भी है, ऐसा वो पहली बार नहीं किया है। 2007 में चीन ने पहली बार ऐसी मिसाइल का परीक्षण किया था। उस मिसाइल ने मौसम की जानकारी देने वाले उसके बेकार हो चुके उपग्रह को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक मार गिराया था। इससे साफ हो गया कि चीन के पास उपग्रह गिराने की क्षमता है। इसके तीन साल बाद चीन ने एक बार फिर अपनी डीएन-2 मिसाइल से अंतरिक्ष में उपग्रह को मार गिराया।

चीनी एंटी-सेटेलाइट मिसाइल परीक्षण का आयोजन 11 जनवरी 2007 को चीन में किया गया था। चीन ने ध्रुवीय कक्षा में पृथ्वी से 865 किलोमीटर ऊपर स्थित अपनी मौसम उपग्रह फेंगयुन-सी जिसका वजन 750 किलोग्राम था। उसे अपनी 8 किमी/सेकंड की रफ़्तार वाली मिसाइल से कक्षा में ही नष्ट कर दिया। यह शिचांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र या उसके पास से एक बहुचरण ठोस ईंधन मिसाइल के साथ लांच किया गया था।

2017 में चीन ने एक नई एंटी-उपग्रह मिसाइल का परीक्षण किया था, उम्मीद है कि यह दुश्मन संचार को नष्ट करने में सक्षम होगा।

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने देश के पूर्वोत्तर में एक सैन्य सुविधा पर दांग नेंग -3 को लॉन्च का पता लगाया था।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मिसाइल ऊपरी वायुमंडल में खराब होने के कारण दिखाई दे रही थी, जहां इसे नष्ट कर दिया गया था।

तब से कई और परीक्षण किए गए हैं, अक्सर मिसाइल एंटीसेप्टर परीक्षण विरोधी के रूप में छिपे हुए हैं।

2013 में चीन ने वर्तमान मॉडल के पूर्ववर्ती डीएन 2 का परीक्षण किया।

डीएन -3 का पहली बार अक्टूबर 2015 में दिसंबर 2016 में एक और परीक्षण किया गया था।

उस परीक्षण को एंटी-मिसाइल इंटरसेप्टर परीक्षण के रूप में भी मुखौटा किया गया था।

वाशिंगटन फ्री बीकन की रिपोर्ट के अनुसार, 23 जुलाई को इनर मंगोलिया के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से दांग नेंग -3 (डीएन 3) का परीक्षण चलाया गया था।

यह सुविधा के पास चीनी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं द्वारा कब्जा कर लिया गया, जिन्होंने अपनी छवियों को ऑनलाइन पोस्ट किया।

हालांकि परीक्षण सफल नहीं हुआ था। चीन उम्मीद करता है कि उनकी प्रगति दमनकारी राज्य को ग्रह के चारों ओर और उसके आस-पास की जगह के क्षेत्र को नियंत्रित करने की दौड़ में अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगी।

पेंटागन द्वारा जारी एक वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने एक सामरिक सहायता बल बनाया है, जो कम्युनिस्ट शासन की अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रयासों को एक साथ लाता है।

यूएस वायु सेना के जनरल जॉन ई हाइटेन, अमेरिकी सामरिक कमांड के कमांडर और एक अंतरिक्ष युद्ध विशेषज्ञ, ने कहा कि चीन और रूस दोनों अंतरिक्ष-युद्ध लड़ने की क्षमताओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

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