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अयोध्या की जो 84 कोसी परिक्रमा की सीमा है, उसमें मस्जिद नहीं बनने देंगे- विश्व हिंदू परिषद

राम नगरी के सांस्कृतिक सीमा को जीवन्त करने के लिए शुरू किया गया 84 कोसी परिक्रमा राम नगरी अयोध्या से हनुमान मंडल समिति के अगुवाई में 1 अप्रैल को सैकड़ो संत करेंगे।

इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए विहिप के सदस्य पुरुषोत्तम नारायण ने बताया कि 84 कोसी परिक्रमा भी अयोध्या पांच कोसी और चौदह कोसी परिक्रमा की तरह जीवन्त जो कि लुप्त हो गया था जिसके कारण से मार्ग भी अवरुद्ध हो गया था, इसलिए हम लोगों ने 84 कोसी परिक्रमा को शुरू किया है।

जितने भी तीर्थ स्थान है वह चौरासी कोसी परिक्रमा के परिपाटी हैं लेकिन बड़ा दुर्भाग्य है कि सब समाप्त हो गया है। सिर्फ नीमसार और गिरिराज की परिक्रमा लोग करते हैं और अयोध्या में इसलिए है कि अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा को संतो ने तय किया है की 84 कोसी परिक्रमा ही सांस्कृतिक सीमा और इस सीमा के अन्दर मंस्जिद का निर्माण नहीं होने देंगे ।

लगभग तीन वर्षों से हनुमान मंडल के नेतृत्व में किया जा रहा है। पहले अयोध्या के ही संत जुड़े थे लेकिन अभी तक प्रदेश और देश के लोग भी जुड़ चुके है। इस वर्ष देश के विभिन्न कोने से संत आ रहे हैं ।

परिक्रमा के प्रमुख सुरेन्द्र सिंह ने परिक्रमा की जानकारी देते हुए बताया कि अयोध्या के कार सेवक पुरम से महाआरती कर इस परिक्रमा की शुरुआत करेंगे। उन्होंने बताया कि संत 265 किलो मीटर की परिक्रमा में फैजाबाद में 100 , गोंडा 90 , बस्ती 50, अम्बेडकर नगर में छह तथा बाराबंकी में 12 किलो मीटर की परिक्रमा करेंगे।

पिछले वर्ष हुए इस कार्यक्रम के दौरान 350 सन्त थे लेकिन इस बार वह संख्या बढ़कर 500 से अधिक होगी । जिसके लिए तैयारी पूरी कर लिया गया है और देश भर के संत अयोध्या पहुंच रहे हैं ।

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