अयोध्या विवाद: मोदी सरकार को अखाड़ा परिषद का अल्टिमेटम, चुनाव से पहले शुरू हो राम मंदिर निर्माण

अयोध्या विवाद: मोदी सरकार को अखाड़ा परिषद का अल्टिमेटम, चुनाव से पहले शुरू हो राम मंदिर निर्माण
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अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद(एबीएपी) के संत अब किसी तरह की लेटलतीफी नहीं चाहते हैं। संतों ने 2019 लोकसभा चुनाव से पहले मंदिर निर्माण न शुरू होने पर बीजेपी सरकार को अल्टिमेटम भी दिया है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से शनिवार को कहा कि यदि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मंदिर निर्माण कार्य नहीं शुरू होता है तो वे अन्य विकल्प तलाशेंगे।

एबीएपी प्रेजिडेंट गिरी ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी सरकार को पूर्ण बहुमत मिला। सत्ता में साढ़े चार साल पूरे होने के बावजूद उन्होंने अपने सबसे अहम चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में बहुत कम ध्यान दिया है।’ यही नहीं, उन्होंने कहा कि संत समाज अब बिना किसी देरी के राम मंदिर निर्माण चाहता है और वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन करता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार को इस मुद्दे पर कानून बनाना चाहिए।

‘…वरना सत्ताधारी पार्टी का नहीं करेंगे समर्थन’
नरेंद्र गिरी ने कहा कि हिंदू संत राम मंदिर की वजह से ही बीजेपी के साथ हैं क्योंकि यह हिंदुओं के हृदय के बेहद करीब है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, ‘2019 लोकसभा चुनाव से पहले मंदिर निर्माण की दिशा में जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। अन्यथा, हम 2019 के चुनावों में सत्ताधारी पार्टी का समर्थन न करने के फैसले पर मजबूर हो सकते हैं।’ बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई अब 29 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है।

राम मंदिर को लेकर मुख्य पक्षकार राम लला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और हिंदू महासभा हैं। इसके अलावा अन्य कई याची जैसे सुब्रमण्यन स्वामी आदि की अर्जी है, जिन्होंने पूजा के अधिकार की मांग की हुई है लेकिन सबसे पहले चार मुख्य पक्षकारों की ओर से दलीलें पेश की जाएंगी।

क्या है अयोध्या विवाद
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिए फैसले में कहा था कि तीन गुंबदों में बीच का हिस्सा हिंदुओं का होगा जहां फिलहाल रामलला की मूर्ति है। निर्मोही अखाड़ा को दूसरा हिस्सा दिया गया इसी में सीता रसोई और राम चबूतरा शामिल है। बाकी एक तिहाई हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया गया। इस फैसले को तमाम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा यथास्थिति बहाल कर दी थी।

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